News

अगर भरोसा 'मर' गया तो...?

Last Modified - June 10, 2015, 10:56 pm

एक दर्शक/प्रशंसक ने बड़ा सीधा सा सवाल पूछा। जवाब मेरे पास नहीं है,सो आप से सवाल साझा करता हूं। सवाल सिंपल है "भैया,आप तो पैसा देकर MBBS करने वाले फर्जी डॉक्टर्स के बारे इतना बताते हो,मुझे अपने पिता का इलाज करना है,क्या आप बता सकते हो कि कौन सा डॉक्टर असली है,सही है ? क्योंकि मैं पिता को लेकर कोई रिस्क नहीं ले सकता। " सवाल सीधा था,पर उसके जवाब की पृष्ठभूमि इतनी विस्तृत,उलझन भरी,तथ्यों से पटी हुई है -जिसमें व्यापमं फर्जीवाड़ा,मुन्नाभाईयों की धर-पकड़,बीडीएस घोटाला और ताजा डी-मैट घोटाला तक शामिल है।हालिया अपडेट में मध्यप्रदेश में डीमेट कोषाध्यक्ष/कोऑर्डिनेटर योगेश उपरीत ने डीमेट परीक्षा में गड़बड़ी के चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सच्चाई क्या है,कौन दोषी हैं,कौन से बड़े नेता-मंत्री-अधिकारी इसमें लिप्त हैं,किसने कितने लोगों को कितने लाख में परीक्षा पास की या करवाई है। इन सबके उलट चिंताजनक तथ्य ये है कि 1998 के बाद के लगभग हर बैच के नई पीढ़ी के डॉक्टर्स खासकर प्राइवेट सीटों पर दाखिला लेकर पढ़ रहे डॉक्टर्स को लेकर यूनिवर्सल शंका,सवाल और घृणा पैदा हो गई है। ये संकट उन डॉक्टर्स जिन्होंने अनुचित तरीकों का इस्तमाल किया उनके लिए तो है ही,साथ ही उन यंग डॉक्टर्स के लिए भी है जो उन्हीं बैचेस में,उन्हीं सालों में अथक परिश्रम कर,पढ़ाई कर,गलाकाट कॉम्पीटीशन पार कर डॉक्टर्स बने हैं।वाकई,जितना सोचो उतनी ही पीड़ा होती है- एक तरफ हर अस्पताल को डॉक्टर्स चाहिए। नित नई बीमारियां और मेडिकल आयाम के हिसाब से फ्रेश,यंग टैलेंटेड डॉक्टर्स की जरूरत है। ज्यादातर युवा डॉक्टर्स इसके लिए जी तोड़ कोशिश भी कर रहे हैं लेकिन लगातार आती फर्जी डॉक्टर्स की खबरे,एडमीशन के वक्त एक से बढ़कर एक धोखाधड़ी की मिसालें और कार्रवाईयों के आंकडों ने पूरी यंग डॉक्टर्स बिरादरी पर शंका पैदा कर दी है जो इस डॉक्टर्स जनरेशन के साथ-साथ समाज के लिए भी बहुत संकट की बात है। याद कीजिए जब हम किसी भी मरीज को अस्पताल ले जाते हैं,डॉक्टर्स की कही एक-एक बात पत्थर पर लकीर की तरह मानते हैं, वो जैसा कहते हैं-वैसा ही पालन करते हैं। पर क्या हो जब धऱती पर भगवान कहलाने वाले डॉक्टर्स के एक-एक कदम पर नज़र रखी जाए,उनसे हर बात की वजह पूछी जाए,उसे री-कंफर्म,सैंकेड उपीनियन लेकर ही भरोसा किया जाए। अव्वल तो ये मुमकिन नहीं पर और अगर ऐसा होने लगे तो क्या चूर-चूर विश्वास के सहारे मरीज ठीक हो पाएगा ? क्या डॉक्टर्स का परम आदरणीय पद कायम रह पाएगा ? नहीं ना। तो आप भी उन धनकुबेरों से करबद्ध प्रार्थना जरूर कीजिएगा - कि साहब ! आपके पास पैसा है,आप अपने सपूतों को जो चाहे बना दें,पर बिना काबिलीयत वाला एक डॉक्टर बनाना..पूरे समाज को उनके धरती के भगवान से दूर करने जैसा है,विश्वास छलनी करने वाला है,उन्हें महज एक प्रोफेशनल बना कर रख देने वाला है। क्योंकि भले भी आज तकनीक और मशीनों के सहारे शरीर को टैक्निकली ज़िंदा रखा जा सकता हो....पर जीने के लिए तो...भरोसा...उम्मीद...ईमानदारी ही जरूरी होती है।

Trending News

Related News