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इस बार सिर्फ सोचिए मत....

Created at - June 16, 2015, 11:41 am
Modified at - June 16, 2015, 11:41 am

गर्मियों की छुट्टीयां खत्म, स्कूल खुल गए....भारी भरकम बैग लादे बच्चे फिर से सड़कों पर, रिक्शों पर या मम्मी-पापा के साथ गाड़ियों में नजर आने लगे हैं..इन नौनिहालों को सड़कों पर स्कूल ड्रेस में जाते देखना बहुत अच्छा लगता है....लेकिन.....जहां ये नौनिहाल जा रहे हैं..वहां क्या हालात है...इस पर बहुत बातें होती हैं...बहुत से विशेषज्ञ, विद्वान द्वारा लिखा भी जाता है..लेकिन हालात जस के तस..बड़ी तकलीफ होती है जब बच्चों को भारी भरकम बैग घसीटते देखतें हैं...मन किलसता है...कहता है कुछ करो...लेकिन क्या......???.....निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी फीस और दूसरे खर्च....माता-पिता सक्षम हों या ना हो बच्चे के भविष्य के लिए घऱ के जरुरी खर्चों में कटौती कर उसे पूरा करते हैं.....लगातार बढ़ता मनमाना कोर्स.....जो बच्चों के समझ में आए ना आए उन्हें रटना पड़ता है......। एक छोटे से बच्चे के कोर्स बुक में एक सवाल पढ़ा...Who's President of india ?...बच्चे से पूछा तो उसने तत्काल सवाल का सही जवाब भी दे दिया...कल ही मैम ने पढ़ाया था.....लेकिन जब उस बच्चे से प्रेसिडेंट और इंडिया का मतलब पूछा तो मासूम बगले झांकने लगा....कोर्स में सवाल बेहद जरुरी था...क्योंकि रेपुटेशन का सवाल था....कि नन्हें से स्टूडेंट को प्रेसिडेंट का भी नाम पता है । निजी स्कूलों की मनमानी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि सरकारी स्कूलों की हालत पतली है....जितना खर्च सरकारें सरकारी स्कूलों और शिक्षा पर करती हैं उसका आधा ही खर्च कर निजी स्कूल ढ़ेर सारा मुनाफा और बच्चे इकट्ठा कर लेते हैं । जबकी सरकारी स्कूल प्रवेशोत्सव ही मनाते रह जाते हैं । सवाल ये उठता है कि क्या वाकई सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए मिड डे मील, फ्री गणवेश जैसे प्रावधान काफी हैं...मुझे लगता है कि हकीकत ये है कि सरकारी स्कूल मजबूरी बन गए हैं.....अगर सरकारी स्कूलो में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक सक्षम हों तो शायद वो भी उनको वहां से निकालकर निजी स्कूलों में डाल दें । ये भयावह स्थिति है....क्योंकि हमारी व्यवस्था में शिक्षा व्यवस्था को जिस लापरवाहीपूर्वक लिया जा रहा है वो स्थिति आगे चलकर कई सारी समस्याएं पैदा करती जाएगी.......अगर सरकारों को बेरोजगारी से लेकर जातपात, मजबूत आर्थिक ढांचा खड़ा करने जैसी समस्याओं का इलाज करना है तो हल समस्या की शाखाओं में नही बल्कि जड़ में ढूंढना होगा...और इन समस्याओं की जड़ है खराब होती शिक्षा व्यवस्था...आप खुद सोचिए प्राचीन समय में हमारा समाजिक और आर्थिक ढांचा मौजूदा समय जैसा पंगु नही था.....उसका कारण था हमारी मजबूत शिक्षा व्यवस्था। हमारे देश में जबतक सरकारी स्कूलों की हालत नही सुधरेगी.....निजी स्कूलों की मनमानी चलती रहेगी.....और अभिभावक यूं ही लुटते रहेंगे....इसीलिए सरकारों को चाहिए की अगर आज देश में मौजूद कई समस्याओं से मुक्ति पाना है तो शिक्षा और उसको पहुंचाने वाली संस्थाओं को सुधारना बेहद जरुरी है.......वरना हम यूंही समस्याओं की शाखाओं को काटते रहेंगे और समस्या अपनी जड़ हर बार मजबूत करती रहेगी । इस बार सिर्फ सोचिए मत...कुछ कर दीजिए........


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