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भोपाल: शिवराज कैबिनेट के फैसले, MP बोर्ड में NCERT सिलेबस होगा लागू

Last Modified - November 9, 2016, 7:27 am

भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूलों में अब NCERT का सैलेबस लागू होगा। शिवराज कैबिनेट ने आज हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उधर प्रदेश के लोगों का हेप्पीनेस इंडेक्स जानने के लिए मध्यप्रदेश सरकार एक सर्वे भी कराएगी। आनंद विभाग के आगामी आयोजनों को शिवराज कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। लेकिन खास बात ये रही उपचुनाव प्रचार में जुटे कई मंत्रियों ने चुनावी ड्यूटी के चलते कैबिनेट की बैठक को नजरअंदाज कर दिया।

मध्यप्रदेश के स्कूलों में अब NCERT के सैलेबस से पढ़ाई होगी। सातवीं, नवमीं और ग्यारहवीं कक्षा में अगले शैक्षणिक सत्र से एनसीईआरटी का सैलेबस लागू हो जाएगा। इस प्रस्ताव में मंगलवार को हुई शिवराज कैबिनेट की बैठक में मुहर लग गई। इसके अलावा शिवराज कैबिनेट में अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय दिल्ली के लिए ट्रांसलेटर के 10 पद मंजूर कर दिए गए। साथ ही कोर्ट में लंबित मामले जल्दी निबटाने के लिए तीन मंत्रियों और तीन प्रमुख सचिवों की समिति बनाई गई है। विद्युत वितरण कंपनियों को पावर फायनेंस कंपनी से लोन लेने के लिए सरकार गारंटी देगी। इसके अलावा जबलपुर में कैट के भवन के लिए जमीन की मंजूरी और आईटी सेक्टर में निवेश के लिए नई नीति को भी कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल गई।

इसके अलावा कैबिनेट बैठक में आनंद विभाग का प्रजेंटेशन भी हुआ । प्रजेंटेशन में बताया गया कि प्रदेश के लोगों का हेप्पीनेस इंडेक्स जानने के लिए फरवरी 2017 तक सर्वे कराया जाएगा....। साथ ही 14 जनवरी से 21 जनवरी तक ग्राम पंचायतों में आनंद उत्सव का भी आयोजन होगा।

इस कैबिनेट की इस बैठक से तमाम मंत्री नदारद रहे। इनमें से ज्यादातर की ड्यूटी शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा चुनाव में लगी थी। इन मंत्रियों में उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला, सामान्य प्रशासन मंत्री   लाल सिंह आर्य,  एमएसएमई मंत्री संजय पाठक, गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, खाद्य मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे, सहकारिता राज्य मंत्री, विश्वास सारंग शामिल हैं, जबकि आदिम जाति कल्याण मंत्री ज्ञान सिंह खुद चुनाव लड़ने की वजह से कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हो सके। इसके अलावा आयुष राज्य मंत्री हर्ष सिंह बीमार हैं जबकि पिछडा वर्ग मंत्री ललिता यादव छतरपुर में स्थानीय कार्यक्रम में व्यस्त रहीं। जाहिर है कि सरकार के लिए कैबिनेट की बैठक से ज्यादा चुनाव प्रचार अहम है और हो भी क्यों नहीं आखिर सरकार की साख जो दांव पर लगी है।

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