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बेमिसाल कलाम को सलाम

Last Modified - July 28, 2015, 11:54 pm

'जो लोग जिम्मेदार, सरल, ईमानदार एवं मेहनती होते हैं, उन्हे ईश्वर द्वारा विशेष सम्मान मिलता है, क्योंकि वे इस धरती पर उसकी श्रेष्ठ रचना हैं' मिसाइल मैन के नाम से मशहुर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की कही ये बात खुद उन पर सटीक बैठती हैं.. कलाम इस धरती पर ईश्वर की श्रेष्ठ रचना थे जिन्होंने 83 साल की अपनी बहुआयामी ज़िंदगी को बेहद शानदार लेकिन सरल अंदाज में जिया और आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं तो ऐसी शून्यता आ गई है जिसकी भरपाई सदियों तक संभव नहीं हैं.. उनके जाने का गम हर देशवासियों के जहन में है.. हर आंख नम है चाहे वो हिंदू है, मुसलमान है, सिख या ईसाई है..एपीजे अब्दुल कलाम तमिलनाडू के रामेश्वरम में एक छोटे से गांव धनुषकोठी में एक मध्यमवर्गीय नाविक परिवार में पैदा हुए और अपनी विलक्षण प्रतिभा और बेहद सरल स्वभाव के चलते वो देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुए.. देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई 2002 से लेकर 25 जुलाई 2007 तक का उनका कार्यकाल सबसे यादगार रहा.. इस दौर में उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम लोगों के लिए खोल दिए.. तभी उन्हें आम आदमी का राष्ट्रपति भी कहा जाता था.. बच्चों और युवाओं से उन्हें बेहद लगाव था और अपनी पूरी जिंदगी उन्होंने इसी ताकत को तराशते हुए गुजार दी.. संयोग देखिए कि जब उन्होंने आखिरी सांस ली तब भी वो शिलॉंग में छात्रों को पर्यावरण का पाठ पढ़ा रहे थे.. विलक्षण वैज्ञानिक होते हुए भी एक कुशल राजनीतिज्ञ के तौर पर भी उन्हें जाना जाता रहेगा.. साल 2005 में पाकिस्तान के परवेज़ मुशर्रफ़ भारत आए थे तक वो राष्ट्रपति कलाम से भी मिले थे.. मुलाकात से एक दिन पहले कलाम के सचिव पीके नायर ने कलाम को कहा कि कल होने वाली बैठक में मुशर्रफ़ कश्मीर का मुद्दा उठा सकते हैं लिहाजा आप इस विषय पर तैयार रहें तब कलाम ने 'चिंता ना करो, मैं सब संभाल लूंगा'.. अलगे दिन मुशर्रफ़ मुलाकत के लिए आए.. कलाम ने बोलना शुरू किया, ''राष्ट्रपति महोदय, भारत की तरह आपके यहाँ भी बहुत से ग्रामीण इलाक़े होंगे. आपको नहीं लगता कि हमें उनके विकास के लिए जो कुछ संभव हो करना चाहिए?'' जनरल मुशर्रफ़ हाँ के अलावा और क्या कह सकते थे.. इसके बाद कलाम में 'पूरा' यानि "प्रोवाइंडिंग अर्बन फ़ैसेलिटीज़ टू रूरल एरियाज़" पर बोलना शुरू किया और अगले 26 मिनट तक मुशर्रफ़ को लेक्चर दिया कि ‘पूरा’ का क्या मतलब है और अगले 20 सालों में दोनों देश इसे किस तरह हासिल कर सकते हैं... तीस मिनट बाद मुशर्रफ़ ने कहा, ''धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय. भारत भाग्यशाली है कि उसके पास आप जैसा एक वैज्ञानिक राष्ट्रपति है.'' हाथ मिलाए गए और नायर ने अपनी डायरी में लिखा, ''कलाम ने आज दिखाया कि वैज्ञानिक भी कूटनीतिक हो सकते हैं.''इसी तरह मई 2006 में राष्ट्रपति कलाम का सारा परिवार उनसे मिलने दिल्ली गया.. परिवार के 52 सदस्यीय लोग आठ दिन तक राष्ट्रपति भवन में रुके.. अजमेर शरीफ़ भी गए... इस दौरान इनके रुकने का सारा खर्च यहां तक कि एक प्याली चाय तक का भी हिसाब रखा गया और उनके जाने के बाद कलाम ने अपने अकाउंट से तीन लाख बावन हज़ार रुपए का चेक काट कर राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा... ये छोटे-छोटे वाकये कलाम की बुलंद शख्सियत और उनकी राष्ट्रभक्ती को बयां करती है.. कलाम अक्सर कहा करते थे कि "चलो हम अपना आज कुर्बान कर दें, ताकि अपने बच्चों को बेहतर कल दे सकें".. आज कलाम अपना सब कुछ देश पर कुर्बान कर चले गए.. लेकिन कई मायनों में कलाम कहीं नहीं गए हैं, क्योंकि "कलाम मरते नहीं", कलाम जिंदा रहेंगे हम सब के जेहन में, हर आंख में, हर धड़कन में...

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