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खंडवा में सजा 'दादाजी का दरबार'

Created at - July 30, 2015, 7:34 pm
Modified at - July 30, 2015, 7:34 pm

खंडवा में स्थित 'दादाजी' के दरबार में गुरू पूर्णिमा के पावन मौके गुरु-शिष्य परंपरा की झांकी सजी है।खंडवा स्थित दादाजी के दरबार में दो महान संतों की समाधी पर दर्शनों के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दादाजी दरबार की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। दादाजी का दरबार विशाल मंदिरनुमा आश्रम है..जिसमें बड़े और छोटे दादाजी दिव्य स्वरूप में विराजमान हैं। मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित श्री दादाजी का दरबार में दो ऐसे संतों ने समाधि ली...जिनके बारे में ऐसी मान्यता है कि वो साक्षात शिव और विष्णु के अवतार थे। भक्त इन्हें बड़े दादाजी और छोटे दादाजी के नाम से जानते हैं । खंडवा के इस पवित्र माटी में बीसवीं सदी के महान अवधूत संत श्री 1008 श्री केशवानंदजी महाराज दादाजी धुनीवाले और श्री हरिहर भोले भगवानजी की समाधि है...। श्री दादाजी धुनीवाले को लोग भगवान शिव का अवतार मानते हैं...वहीं श्री हरिहरानंदजी महाराज यानी छोटे दादाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है...। केशवानंदजी महाराज के जन्म के बारे में कई किवदंतियां हैं...लेकिन उनका जन्म होशंगाबाद जिले के साईखेड़ा में हुआ था...। दादाजी के दरबार में आज एक बड़ा आश्रम मौजूद है। क़रीब 22 एकड़ ज़मीन में फैले दादा दरबार में गुरु-शिष्य की समाधि भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुई है। खंडवा वो तपोस्थली है...जहां का दादाजी दरबार 84 सालों से गुरु-शिष्य के तपोबल से देदिप्यमान है। स्वामी केशवानंदजी महाराज के नाम से पहचाने जाने वाले बड़े दादाजी महाराज को 3 दिसंबर 1930 को महानिर्वाण प्राप्त हुआ था..वहीं श्री हरिहरानंद भोले भगवान छोटे दादाजी ने 4 फरवरी 1942 को अपनी देह त्यागी...। पूरे भारत में दादाजी धुनीवाले के दो दर्जन से ज्यादा आश्रम मंदिर और दरबार हैं...लेकिन मूल स्थान खंडवा में ही है....। यहां हर साल आषाढ़ महीने की गुरु पूर्णिमा पर लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं ।


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