News

नर्मदा की लहरे सहेजे बसा ये 4000 साल पुराना शहर, वाटर स्पोर्ट्स के लिए फेमस डेस्टिनेशन

निमाड़ अंचल में हर कोस पर शिव के धाम नजर आते हैं लेकिन महेश्वर की बात ही अलग है। इस नगर पर शिवजी की ऐसी कृपा है..इसे गुप्त काशी भी कहा जाता है। महेश्वर में महादेव के कई मंदिर है, जिनमें प्रमुख है राज-राजेश्वर मंदिर। इसके साथ ही कालेश्वर और अखिलेश्वर मंदिर की भी बड़ी ख्याति है। लेकिन आज हम आपको बताएंगे महेश्वर के अधिष्ठाता देव राज-राजेश्वर सहस्त्रबाहू की ।

हम बात कर रहे है महेश्वर के प्रसिद्ध मंदिर राज-राजेश्वर मंदिर की इस मंदिर की स्थापना त्रेतायुग में हुई थी। मंदिर के गर्भगृह में एक विलक्षण शिवलिंग की स्थापना की गई है। वहीं गर्भगृह को छत को भी कांच के टुकड़ों  के जरिए विशेष रूप से सजाया गया है। राजराजेश्वर का ये मंदिर महेश्वर के प्राचीन किले के अंदर स्थित है। महादेव का इतना भव्य मंदिर प्रदेश में कम ही जगहों पर मौजूद हैं। इस शिवधाम के साथ चमत्कारों की कई कहानियां भी दर्ज हैं। मंदिर की एक और बड़ी विशेषता है....यहां मौजूद प्राचीन नंदा दीपक। इस दीपक को 550 साल पुराना माना जाता है। इसमें 11 घी के दीपक हैं, जो सालों से अखंड रूप से जल रहे हैं। यहां शिव का पार्थिव पूजन किया जाता है, जिसमें मिट्टी की छोटी छोटी गोली बनाकर चांवल के साथ उनकी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि यहां महादेव सबकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। भक्तों को मांगी मुरादे पूरी होने पर वो यहां स्थापित 11 नंदा दीपकों को देशी घी से जलाते हैं। मान्यता ये भी है कि शिवजी ने यहां सुदर्शन चक्र के रूप में अवतार लिया था ।

राज राजेश्वर मंदिर के परिसर में ही भगवान राजेश्वर सहस्त्राबाहु का मंदिर स्थापित है....जहां हर साल सहस्त्राबाहु जयंती पर श्रद्धाओं का मेला लगता है। यहां सहस्त्रबाहु के मंदिर का निर्माण भी कराया जा रहा है। महेश्वर आने वाले श्रद्धालु पहले नर्मदाजी में डूबकी लगाते हैं, उसके बाद शिव दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। आज देश भर के हर आम और खास की हाजिरी महादेव के दर में लगती है, तो पुराने वक्त में भी राजा-महाराजा यहां हर रोज आया करते थे। कहते हैं कि यहां की इतिहास प्रसिद्ध रानी अहिल्याबाई भी भगवान शिव के दर्शन करने यहां नियमित तौर पर आती थीं।

महेश्वर के इतिहास की बात करे तो नर्मदा के श्यामल तट पर एक ऐतिहासिक शहर का विकास हुआ है। महेश्वर के इतिहास के पन्नों को पलटें तो सबसे पहले होल्करों का शासनकाल ज़्ाहन में उभर कर सामने आता है। साथ ही याद आती हैं रानी अहिल्या बाई...जिन्होंने स्वयं अपने बेटे को न्याय की भेंट चढ़ा दिया था। महेश्वर की पहचान शिव की नगरी के रूप में होती है...लेकिन महेश्वर को रानी अहिल्याबाई के शासन और न्यायप्रियता के लिए भी पहचाना जाता है। इस शहर में अहिल्याबाई ने 1764 से लेकर 1795 तक तक राज किया। उनके न्याय की मिसाल आज भी लोग देते हैं। अहिल्या बाई इतिहास में एक कुशल शासक के तौर पर जानी जाती है। 18वीं में जब पूरा भारत अशांत था, तब भी उनके शासनकाल

Trending News

Related News