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रोमांच से भरा होगा भारत के आखिरी गांव का सफर, यहां से पांडव गए थे स्वर्ग

यदि आपको घुमने का शौक है और लगतार नए-नए डेस्टिनेशन की तलाश में रहते है तो आपको इस गांव जरूर आना चाहिए, आपको भारत का आखिरी गांव जरूर देखना चाहिए, अपने देश का आखिरी गांव, जिसको लेकर तमाम रोचक किस्से भी मशहूर हैं। जैसे कि कहते हैं कि इस गांव से होते हुए पांडव स्वर्ग गए थे, यह गांव चीन की सीमा पर उत्तराखंड के बद्रीनाथ से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यानि यहां तक पहुंचना उतना मुश्किल भरा भी नहीं है। इस गांव का पौराणिक नाम मणिभद्र है, यहां आपको अलकनंदा और सरस्वती नदियों का संगम देखने को मिलेगा। इसके अलावा यहां गणेश गुफा, व्यास गुफा और भीमपुल भी देखने लायक हैं। यहीं से होकर पांडव स्वर्ग गए थे। चलिए आपको दिखाते हु माणा गांव से जुड़ी कुछ रोचक काहानियां -

एक प्रचलित कहानी के मुताबिक, जब गणेश जी वेदों को लिख रहे थे तो सरस्वती नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी और बहुत शोर कर रही थी। गणेश जी ने सरस्वती जी से कहा कि शोर कम करें, मुझे कार्य में व्यवधान हो रहा है, लेकिन सरस्वती जी नहीं रुकीं। इससे रुष्ट होकर गणेश जी ने इन्हें श्राप दिया कि आज के बाद इससे आगे तुम किसी को नहीं दिखोगी।

ऐसी ही एक अन्य कहानी है जो महर्षि वेदव्यास से जुड़ी है व्यास गुफा के बारे में बताया जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने यहां वेद, पुराण और महाभारत की रचना की थी और भगवान गणेश उनके लेखक बने थे। ऐसी मान्यता है कि व्यास जी इसी गुफा में रहते थे। वर्तमान में इस गुफा में व्यास जी का मंदिर बना हुआ है। व्यास गुफा में व्यास जी के साथ उनके पुत्र शुक्रदेव जी और वल्लभाचार्य की प्रतिमा है। इनके साथ ही भगवान विष्णु की भी एक प्राचीन प्रतिमा है।

यदि आप चाय के शौकीन है और और अपने साथ कुछ ऐसे किस्से ले जाना चाहते है, जिन्हे बाद में दोस्तों को सुनाकर रोमांचित किया जा सके तो आपके लिए भारत की आखरी चाय की दुकान पर चाय पीना एक अलग ही अनुभव होगा। मई से अक्टूबर महीने के बीच यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यह समय माणा गांव आने का सबसे बेहतर समय माना जाता है। छह माह तक इस गांव में खासी चहल-पहल रहती है। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हो जाने पर यहां पर आवाजाही बंद हो जाती है।

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