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डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन के जलवायु परिवर्तन की नीति को रद्द किया

Last Modified - March 29, 2017, 1:30 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन के जलवायु परिवर्तन समझौते को उलटने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन की नीतियों को छलावा बताया है और पेरिस समझौता से अमेरिका को अलग करने की धमकी भी दी है. यह समझौता पिछले साल से प्रभावी हो हुआ था.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने की कोशिश के तहत यह समझौता किया था. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने सीन स्पाइसर के हवाले से बताया गया था कि ट्रंप कानूनी बाधाओं को कम करके देश के ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए कार्यकारी आदेश जारी करेंगे. इससे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे आर्थिक विकास में तेजी आएगी और नौकरियां पैदा होंगी.

जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रपति ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति ओबामा अलग-अलग नजरिया रखते हैं. ओबामा का मानना था कि दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन हो रहा है और इस समस्या से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता. नए आदेश के तहत ओबामा की स्वच्छ ऊर्जा योजना को रद्द कर दिया गया है.

जिसमें पेरिस समझौते के आधार पर अमरीका के सभी राज्यों को कार्बन उत्सर्जन की सीमा को घटाना था.रिपब्लिकन पार्टी शासित राज्य इन नियमों पर पहले ही अपनी आपत्ति जता चुके हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस योजना के रद्द होने से अब लोगों को काम मिलेगा और देश में ईंधन के आयात में कमी आएगी.

साथ ही कहा गया कि पिछली सरकार ने अपनी नीतियों के जरिए कामगारों से रोजगार छीना और अब उनकी सरकार लोगों को काम देने के साथ-साथ पर्यावरण को भी बचाएगी. जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में ओबामा प्रशासन की यह शुरुआत दुनिया भर में सराही गई थी. एक सप्ताह पहले ट्रंप के पहले संघीय बजट में भी जलवायु परिवर्तन को उलटने की मंशा साफ तौर पर जाहिर की थी. उन्होंने इसमें स्वच्छ ऊर्जा योजना के लिए फंड में कटौती समेत अन्य कदम उठाए.

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