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मूवी रिव्यू: फिल्म 'लाली की शादी में लड्डू दीवाना'

स्टार कास्ट- अक्षरा हसन, विवान शाह, गुरमीत चौधरी, सौरभ शुक्ला
निर्देशक- मनीष हरिशंकर


मनीष हरिशंकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी लाली और लड्डू के इश्क से शुरू होती है। लेकिन कहानी में एक के बाद एक ट्विस्‍ट है। पहला ट्विस्‍ट तब‍ आता है जब किसी वजह से लाली, लड्डू से नहीं बल्कि वीर से शादी करने का फैसला ले लेती है।

स्टोरी- फिल्म की शुरुआत होती है लाली की शादी से, जो नौ महीने की प्रेग्नेंट है और वीर से शादी के बंधन में बंधने वाली है। उसी मंडप में लड्डू भी दूल्हा बना बैठा है। तभी लड्डू होने वाली दुल्हन लेक्चर देकर लोगों को पकाना शुरू करती है, लेकिन लड्डू उससे प्रेरित होकर वीर के पास यह खुलासा करने पहुंच जाता है कि लाली के होने वाले बच्चे का बाप वही है। फिर शुरू होता है फ्लैशबैक यानी लाली और लड्डू की अमर प्रेम कहानी, जिसे देखकर लोग फिल्म देखने के अपने फैसले को कोसने पर मजबूर हो जाएंगे।

अमीर बनने का सपना देखने वाला लड्डू लाली को अमीरजादी समझकर कॉफी के साथ गुलाब का फूल देकर पटा लेता है। लाली को पाकर उसके मन में लड्डू फूटने शुरू ही होते हैं कि पता चलता है कि लाली ने नौकरी छोड़ दी है और उसकी तरह ठन ठन गोपाल हो चुकी है। लाली को भी लड्डू के झूठ पता चल जाता है। फिर भी वह लड्डू के साथ कश्मीर में प्यार भरे गाने के लिए तैयार हो जाती है। हद तो तब होती है जब लड्डू अपनी गर्लफ्रेंड लाली से बॉस की गलत हरकतों को छोटे लेवल का कॉम्प्रोमाइज बताकर सहने की सलाह देता है।

बॉयफ्रेंड की ऐसी नसीहत पर कोई भी लड़की जोर का थप्पड़ लगाएगी, लेकिन लाली चुप रहती है। वह लड्डू पर हाथ तब उठाती है जब वह उसे शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाने पर अबॉर्शन करने को कहता है। इस पर लड्डू के मां-बाप उसे बेदखल कर लाली को अपनी बेटी बना लेते हैं और अमीरजादे वीर से उसकी शादी तय कर देते हैं। अब लाली की शादी वीर से होगी या लड्डू से, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखने की नहीं, बस थोड़ा सा दिमाग लगाने की जरूरत है। हां, वीएचपी वाले ये फिल्म जरूर देख सकते हैं, क्योंकि फिल्म देखने के बाद उन्हें ये तसल्ली हो जाएगी कि उनकी हिंदू संस्कृति सही सलामत है, क्योंकि फिल्म में प्रेग्नेंट महिला की शादी और फेरों का ऐसा कोई सीन नहीं है, जिसे लेकर वे बवाल कर रहे थे।

लड्डू की भूमिका में विवान शाह हैं जबकि लाली की भूमिका में अक्षरा हासन और वीर के किरदार में गुरमीत चौधरी हैं। इसे त्रिकोणीय प्रेम कहानी भी कह सकते हैं। फिल्म की कमजोर कहानी और भटकी पटकथा ने इसे नीरस कर दिया है। कई दृश्य ऐसे लगे जो बेवजह ही इस प्रेम कहानी में दिखे।कमल हासन की छोटी बेटी अक्षरा हासन इस बार भी दर्शकों पर अपना जादू कर पाने में नाकाम रहीं। गुरमीत चौधरी, संजय मिश्रा, सौरभ शुक्ला, रवि किशन और दर्शन जरीवाला का अभिनय फिर भी अच्‍छा रहा।

फिल्म के डायरेक्टर मनीष हरिशंकर ने अपन

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