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बिलासपुर : जिला सहकारी बैंक में बड़ा घोटाला, 5 सालों से बिना टेंडर के चल रहा काम

Last Modified - April 20, 2017, 8:41 am


बिलासपुर के जिला सहकारी बैंक के अंतर्गत बिलासपुर समेत कोरबा, जांजगीर और मुंगेली जिले भी आते हैं। हर साल यहां की सैकड़ों समितियों से किसानों को बीज और खाद बांटी जाती है। इस खाद और बीज को जिला मुख्यालय, रेलवे साइडिंग, गोदामों से समितियों तक पहुंचाना होता है, ताकि वहां से गांव गांव में किसानों को सही समय पर खाद और बीज मिल सकें। लेकिन चारों जिलों में खाद और बीज की खरीदी, बिक्री से लेकर सप्लाई और भंडारण का काम पिछले 5 सालों से बिना टेंडर के चल रहा था। विपणन संघ और बैंक के नेताओँ के साथ अफसरों की मिलीभगत की वजह से टेंडर नहीं होने पर कभी आपत्तियां नहीं आईं और बिल भी पास होते गए। घोटाले बढ़े तो कलेक्टर ने विशेष आडिट कराया, तो पता चला कि परिवहन टेंडर नहीं होने और मनमाना रेट देने से वजह से बैंक को हर साल पांच करोड़ रुपए के हिसाब से पांच साल में 25 करोड़ का नुकसान हो चुका है।

इस घोटाले में सहकारी बैंक के पूर्व पदाधिकारी और अधिकारी के साथ साथ विपणन संघ के वो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने बिल पास किए। चूंकि बड़े अफसरों ने बिल पास कर दिए थे, लिहाजा समिति के कर्ताधर्ताओं ने भी कमीशन में अपना हिस्सा लेकर भुगतान जारी रखा और पांच साल में 25 करोड़ का घोटाला कर डाला। इन पांच सालों की सभी विवादास्पद फाइलें और दस्तावेज बैंक से गायब हो गए हैं। जांच अधिकारी नोटिस पर नोटिस दे रहे हैं, लेकिन हो कुछ नहीं रहा।

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