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रायपुर News

कोत्ताचेरू और बुरकापाल हमले, माओवादियों की तैयारी और पुलिस के कमजोर नेटवर्क को दर्शाता है



कोत्ताचेरू और बुरकापाल हमले माओवादियों की तैयारी को बताता है जबकि पुलिस के कमजोर नेटवर्क को भी ये ज़ाहिर करता है । देखा जाए तो बीते कुछ वक्त से नक्सली ख़ामोश ज़रूर थे. पर उन्होंने न तो अपनी रणनीति बदली और न ही छिन्न-भिन्न हुए. वो बस मौके की ताक में रहे और जैसे ही मौका मिला. उन्होंने एक महीने के अंदर दो बड़े हमले हमले बोल दिए ।

बीते 3 सालों में बदलाव पूरे बस्तर में ये नजर आया है कि माओवादी सिर्फ आरओपी यानी रोड ओपनिंग पार्टी को निशाना बना रहे हैं. दूसरी बड़ी बात ये है कि ऑपरेशन के लिए तैयार की गई स्पेशलाइज्ड फ़ोर्स से माओवादी सीधा टकराने से बचते फिर रहे हैं. फिर चाहे वो डीआरजी के जवान हों या कोबरा बटालियन. इन दोनों फोर्स के जवान बेहद अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों में भी सफल ऑपरेशन करते रहे हैं । ऑपरेशन मोड की बात करें तो ज़िला पुलिस को अब भी बढ़त मिली हुई है पर आरओपी पार्टी माओवादियों के लिए आसान निशाना साबित हो रही हैं ।

सवाल यह भी उठ रहा है कि बीते 2 सालों से माओवादी पूरी तरह खामोश है तो फिर अचानक उनकी ताकत कैसे बढ़ गई. हालांकि अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले कुछ समय से माओवादियों के हमलों में कुछ कमी जरूर आई पर उनकी स्ट्रेटिजी बदली हो.ऐसा नहीं है । बीते साल 30 मार्च 2016 को माओवादियों ने मैलावाडा में विस्फोट कर सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया था । ये जवान निहत्थे थे. अपने कैंप वापस लौट रहे थे.

इससे पहले 1 दिसंबर 2014 को कसालपाड़ में माओवादियों ने सीआरपीएफ को निशाना बनाया था. इसमें भी 14 जवान शहीद हुए थे । याद रखने वाली बात ये है कि गर्मियों की शुरुआत में ही माओवादी हर साल एक न एक बड़े हमले को अंजाम देते रहे हैं । माओवादी की इस टैक्टिकल स्ट्राइक को एक दशक से ज्यादा हो रहा है. जब बस्तर हर गर्मी के शुरू होने से पहले ही सुलगने लगती है. 
ध्यान देने वाली बात ये भी है कि इस दौरान बीते इन 2 सालों में पुलिस ने कई सफल ऑपरेशन किए और करीब 180 माओवादी मारे गए । मुख्य बात ये भी है कि मिशन 15-16 के तहत सुकमा को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जिस तरह टारगेट किया. उसके तहत नक्सलियों को थोड़ा भी नुकसान नहीं पहुंचाया जा सका और न ही कोई बड़ा लीडर मुठभेड़ो में मारा गया. यही वजह है कि माओवादी दबाव में जरूर थे पर उनकी ताकत में कोई खास असर नहीं पड़ा ।

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