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क्या कमजोर पड़ रही साख को बचाने के लिए नक्सलियों ने किया हमला ?

Last Modified - April 26, 2017, 10:31 pm

बस्तर में सुरक्षा बलों पर दो घातक हमले..और उससे उठते सौ सवाल । सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर क्यों अचानक नक्सलियों की आक्रामकता बढ़ी है?

जानकारों की मानें तो इलाके में दमदार मौजूदगी दर्ज कराने..और देश में मैसेज देने के लिए कि लाल आतंक यहां कमजोर नहीं पड़ा है..ये हमले किए गए । दोनों ही हमले लगभग एक ही इलाके में हुए हैं..ये इलाका बरसों से लाल गढ़ के तौर पर जाना जाता रहा है । अपने प्रभाव वाले इलाके में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए ये हमले किए गए । जानकारों को आशंका है..आने वाले दिनों ऐसे कुछ और हमले हो सकते हैं । कहा ये भी जा रहा है कि बस्तर आईजी रहे कल्लूरी के अचानक हटने से एक स्ट्रेटजीकल वैक्यूम बना..जिसका फायदा नक्सली उठा रहे हैं ।

इसी तरह पुलिस और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल की कमी की बात जगजाहिर है..जब भी मौका मिलता है..नक्सली इसका फायदा उठाकर हमला बोलते हैं । सड़क निर्माण की वजह से लाल गढ़ के गांव मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे..और फोर्स की आवाजाही भी बढ़ेगी..इस बात से भी नक्सली परेशान हैं..और वो सड़क सुरक्षा में लगे जवानों को निशाना बना रहे हैं । कुछ लोगों का ये भी कहना है कि कल्लूरी काल में करीब ढाई साल तक नक्सली दबाव में रहे...उससे बाहर निकलने की कोशिश में वो हमले बोल रहे हैं । एक अहम तथ्य ये भी है कि बीते 10 बरसों से वो गर्मियों में बड़े हमले बोलते रहे हैं..इसी रणनीति के तहत उन्होंने ये अटैक किए । ये कुछ ऐसे कारण है..जिनके चलते बस्तर में लाल हिंसा में बढ़ोतरी हुई है । सवाल है..इस सूरतेहाल में अब लाल आतंक को काउंटर कैसे करेगी सरकार?

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