रायपुर News

सुकमा हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद ...सुरक्षा तंत्र की खामी खंगालने में जुटा प्रशासन

Last Modified - April 27, 2017, 11:43 am

 

सुकमा नक्सली हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद अब ये सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि. आखिर सुरक्षा तंत्र में इतनी बड़ी चूक कैसे और किस लेबल पर हुई..? घायल जवानों के तालमेल में कमी बताने, पुलिस के सहयोग नहीं करने और सेना को फ्री हैंड देने जैसी बातें सामने आईं है। हालांकि CRPF के प्रभारी DG, छत्तीसगढ़ पुलिस के DG और नक्सल ऑपरेशन के DG ने इन सारे सवालों को सिरे खारिज करते हुए नई रणनीति पर काम करने की बात कही है।

सुकमा के बुरकापाल में हुए नक्सल हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या सुरक्षा तंत्र में कोई छेद है..? प्रारंभिक तौर पर कई खामियां भी  सामने आई हैं। घायल जवानों ने राज्य और सेंट्रल फोर्स के बीच तालमेल की कमी और सहयोग नहीं करने के सवाल उठाए। वहीं इस वारदात ने एक बार फिर साबित किया कि इंटेलीजेंस और सुरक्षा तंत्र पूरी तरह फेल रहा है। पिछले डेढ़ महीने से सुकमा इलाके में नक्सलियों के खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं हुआ ।

वहीं ये बात भी सामने आई है कि पुलिस STF और DRG बल के भरोसे ही कार्रवाई करती है..। CRPF का उपयोग सिर्फ रोड ओपनिंग पार्टी के रूप में किया जाता है। बुरकापाल सरपंच माड़वी दुला की हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मुखबिर तंत्र पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि CRPF के DG, छत्तीसगढ़ पुलिस के DG और नक्सल ऑपरेशन के DG इन सारे सवालों को खारिज कर रहे हैं।

अफसरों की दलील है कि संख्या में हम नक्सलियों से ज्यादा हैं, लिहाजा नुकसान भी हमें ही उठाना पड़ता है। सुकमा में नक्सलियों ने ग्रामीणों को आगे किया, तो हम तय ही नहीं कर पाए कि क्या करना है..? हम अपनी पहचान और एक्टिविटी छिपा नहीं सकते, जिसका नक्सली फायदा उठाते हैं। अब CRPF के DG, छत्तीसगढ़ पुलिस के DG और नक्सल ऑपरेशन के DG केंद्रीय गृहमंत्री के बयान के मुताबिक नई रणनीति पर काम करने की बात कह रहे हैं।


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