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खूबसूरती का मिसाल तीरथगढ़ जलप्रपात

Last Modified - January 7, 2017, 5:21 pm

छत्तीसगढ़ का नाम आते ही नजरों के सामने एक ऐसे राज्य की तस्वीर आती है, जो हरियाली और धरोहरों से भरा है। यहां ऐसे कितने ही मनोरम स्थान हैं, जो अब भी हमारी औद्योगिक विकास यात्रा से अनछुए हैं और जिंदगी की आपाधापी और तनाव से कुछ ही समय में राहत दिलाने की क्षमता रखते देश का सबसे बड़ा जलप्रपात यहीं मौजूद है।छत्तीसगढ़ के कुछ प्रसिद्ध जगहों में से एक है चित्रकोट प्रपात, जिसे भारत का नियाग्रा प्रपात भी कहा जा सकता है। बस्तर जिले में स्थित चित्रकोट प्रपात में पानी 100 फुट की ऊंचाई से गिरता है। इस जलप्रपात में इंद्रावती, हसदेव, शिवनाथ और महानदी और कई नदियों और उनकी सहायक नदियों का पानी मिलता है, जो आपस में मिल कर देश का सबसे बड़ा और खूबसूरत जलप्रपात बनाता है। दूधहा प्रपात के नाम से मशहूर तीरथगढ़ के तीन प्रपातों में हमेशा सफेद रंग के झाग रहते हैं, जिससे इसे दूध जैसा रंग मिलता है। कांकेर घाटी में स्थित यह जगह अपनी घनी वनस्पतियों और ऐसे जंगलों के लिए मशहूर है। ये जंगल इतने घने हैं कि सूरज की रोशनी भी इन्हें भेद नहीं पाती। ट्रैकिंग के दीवानों के लिए तो यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। इसके नजदीक ही स्थित हैं मशहूर कोटमसर गुफाएं, जो सबसे लंबी और गहरी भूमिगत गुफाएं हैं। जमीन में 300 फुट से भी ज्यादा गहराई में स्थित कोटमसर की अंधेरी और काली गुफाओं में छिपे हैं धरती के गहरे रहस्य। इन गुफाओं में इतना घना अंधेरा होता है कि यहां रहने वाली मछलियां जन्म से ही अंधी होती हैं। उनके विकास के हजारों साल में उन्होंने कभी सूर्य की किरण तक नहीं देखी है। इन गुफाओं के अंत में एक शिवलिंग स्थित है । वैसे तो किसी भी मौसम में इस प्रदेश की यात्रा कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय उद्यानों और गुफाओं को देखने के लिए नवंबर से जून के बीच जाना बेहतर होता है। शानदार जलप्रपात, मनमोहक जंगल और पहाड़ियों के लिए जुलाई से फरवरी के बीच जाना ठीक रहेगा। पुरातत्व और धार्मिक यात्रा के लिए आप कभी भी इस प्रदेश की यात्रा कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के कुछ प्रसिद्ध जगहों में से एक है चित्रकोट प्रपात, जिसे भारत का नियाग्रा प्रपात भी कहा जा सकता है। बस्तर जिले में स्थित चित्रकोट प्रपात में पानी 100 फुट की ऊंचाई से गिरता है। इस जलप्रपात में इंद्रावती, हसदेव, शिवनाथ और महानदी और कई नदियों और उनकी सहायक नदियों का पानी मिलता है, जो आपस में मिल कर देश का सबसे बड़ा और खूबसूरत जलप्रपात बनाता है। दूधहा प्रपात के नाम से मशहूर तीरथगढ़ के तीन प्रपातों में हमेशा सफेद रंग के झाग रहते हैं, जिससे इसे दूध जैसा रंग मिलता है। कांकेर घाटी में स्थित यह जगह अपनी घनी वनस्पतियों और ऐसे जंगलों के लिए मशहूर है। ये जंगल इतने घने हैं कि सूरज की रोशनी भी इन्हें भेद नहीं पाती। ट्रैकिंग के दीवानों के लिए तो यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। इसके नजदीक ही स्थित हैं मशहूर कोटमसर गुफाएं, जो सबसे लंबी और गहरी भूमिगत गुफाएं हैं। जमीन में 300 फुट से भी ज्यादा गहराई में स्थित कोटमसर की अंधेरी और काली गुफाओं में छिपे हैं धरती के गहरे रहस्य। इन गुफाओं में इतना घना अंधेरा होता है कि यहां रहने वाली मछलियां जन्म से ही अंधी होती हैं। उनके विकास के हजारों साल में उन्होंने कभी सूर्य की किरण तक नहीं देखी है। इन गुफाओं के अंत में एक शिवलिंग स्थित है । वैसे तो किसी भी मौसम में इस प्रदेश की यात्रा कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय उद्यानों और गुफाओं को देखने के लिए नवंबर से जून के बीच जाना बेहतर होता है। शानदार जलप्रपात, मनमोहक जंगल और पहाड़ियों के लिए जुलाई से फरवरी के बीच जाना ठीक रहेगा। पुरातत्व और धार्मिक यात्रा के लिए आप कभी भी इस प्रदेश की यात्रा कर सकते हैं।


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