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बुरकापाल हमले के बाद नक्सल मोर्चे पर आक्रामक हुआ केंद्र,गृहमंत्री राजनाथ ने सुझाए 8 सूत्रीय समाधान

Last Modified - May 9, 2017, 1:12 pm

 

नक्सलियों के खिलाफ रणनीति तय करने दिल्ली में हुई हाईलेवल मीटिंग में केंद्रीय गृहमंत्री के साथ 6 राज्यों के मुख्यमंत्री और दस राज्यों के पुलिस, प्रशासन के अफसर और मुख्य सचिव, पुलिस प्रमुख, अर्धसैनिक बलों और खुफिया विभाग के प्रमुख शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए 8 सूत्रीय समाधान सुझाया और नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन के लिए नई स्ट्रैटजी बदलने की बात कही।

24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में CRPF के 25 जवानों की शहादत के दो हफ्ते बाद इस समस्या से निपटने के तरीके तलाशने दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग हुई। बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए 8 सूत्रीय समाधान सुझाते हुए कुशल नेतृत्व, आक्रामक रणनीति, प्रोत्साहन एवं प्रशिक्षण, कारगर खुफिया तंत्र, कार्ययोजना के मानक, कारगर प्रोद्यौगिकी, प्रत्येक रणनीति की कार्ययोजना और नक्सलियों के आर्थिक आधार को विफल करने की रणनीति के साथ विकास कार्यों को पूरा करने तक आक्रामक होने की बात कही।

राजनाथ सिंह ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन का जिक्र करते हुए कहा कि इस समस्या से निपटने कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि इसके लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लांग टर्म स्ट्रैटजी बनाने की जरूरत है। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन की अगुआई अब राज्य करेंगे, जिसमें पैरा मिलिट्री फोर्स उनकी मदद करेंगी। हर बटालियन के साथ UAV या मिनी UAV होगी। गृहमंत्री ने इंटेलीजेंस एजेंसी और सिक्योरिटी फोर्सेस को लोकल पब्लिक के साथ नेटवर्क डेवलप करने की जरूरत बताई। हाईलेवल मीटिंग में केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा, नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और मनोज सिन्हा के अलावा नक्सल प्रभावित 10 राज्यों में से छह राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

राज्यों के मुख्यमंत्रियों की हाईलेवल मीटिंग में चार प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में ही नहीं आए। इनमें से तीन ऐसे राज्य हैं, जहां की सीमा छत्तीसगढ़ से जुड़ी है और रणनीति में इन राज्यों की भूमिका भी काफी अहम है। नक्सल ऑपरेशन की रणनीति पर चर्चा तो हुई। लेकिन सीधे ऑपरेशन की कोई बात नहीं हुई और छत्तीसगढ़ के ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस बैठक के बाद कह दिया कि सर्जिकल स्ट्राइक भला कहीं संभव है क्या..?

नक्सल ऑपरेशन को लेकर दिल्ली में हुई हाईलेवल मीटिंग से ये डराने वाला सच निकलकर सामने आया कि देश के 10 राज्यों के 68 जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं और 90 फीसदी नक्सली वारदात 35 जिलों में होते हैं। यहां 20 साल में नक्सल समस्या की वजह से 12 हजार से ज्यादा जानें गई हैं। लेकिन दो हफ्ते पहले से तय इस हाईलेवल मीटिंग में नक्सलवाद से प्रभावित 10 राज्यों में से चार के मुख्यमंत्री ही नहीं आए। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री ने तो इस मीटिंग के औचित्य पर ही सवाल उठाए। हालांकि होम सेक्रेट्री ने इस पर सफाई भी दी और स्ट्रैटजी का खुलासा न करने की बात कही।

25 अप्रैल को सुकमा के बुरकापाल में हुए हमले के बाद लगातार ये बातें कही जा रही थी कि नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन की तैयारी है। सरकार सर्जिकल स्ट्राइक भी कर सकती है। लेकिन हाईलेवल मीटिंग में ऐसे कोई फैसले नहीं हुए। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी बैठक से निकलते ही ऐसी किसी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। नक्सलियों के खिलाफ दिल्ली में हुई हाईलेवल मीटिंग पर सवाल तो उठने लगे हैं, मगर इसका बस्तर के बीहड़ में क्या असर होता है... आने वाला वक्त भी बताएगा..?

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