रायपुर News

रायपुर: सरकारी उदासीनता के शिकार पेंट फैक्ट्री मृतकों के परिजन

Last Modified - May 17, 2017, 12:17 pm

 

रायपुर के भनपुरी इलाके के धनलक्ष्मीनगर के MP पेंट की फैक्ट्री में लगी आग में जिंदा जलो दोनों मजदूरों के परिजनों को मुआवजे के नाम पर अब तक एक रुपया भी नहीं मिला है। संगीता नाम की एक महिला मजदूर का अंतिम संस्कार तो पड़ोसियों ने चंदा कर रकम जुटाने के बाद किया। वहीं कलेक्टर ने फैक्ट्री अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं.

मौत के बाद मातम और आंसुओं से भीगा ये वो बदनसीब मजदूर संगीता का परिवार है, जिसने अपनों को हादसे में गंवाने के बाद मोहल्ले के लोगों से मिले चंदे के रुपयों से आखिरी विदाई दी है। रायपुर के भनपुरी इलाके के धनलक्ष्मीनगर के MP पेंट की फैक्ट्री में लगी आग में जिंदा जलो दोनों मजदूरों के परिजनों को मुआवजे के नाम पर अब तक एक रुपया भी नहीं मिला है। यही स्थिति इसी दुर्घटना में मारे गए अभिषेक सिंह के परिवार की भी है। उन्हें भी अब तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है। यही नहीं, हादसे के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में उलझे परिजनों को शाम सात बजे के बाद अंतिम संस्कार के लिए लाश मिली। 

धनलक्ष्मीनगर के आसपास ऐसी 20 से ज्यादा फैक्ट्रियां है, जहां एसिड, फेविकोल, कैमिकल और एल्युमिनियम बनाया जाता है। मोहल्ले वाले अब इन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं। आपको बता दें कि इससे पहले भी यहां हादसा हो चुका है। लोगों ने विरोध के बाद कलेक्टर और पुलिस के पास शिकायत की थी। नगर निगम ने भी फैक्ट्री को जर्जर घोषित करते हुए इसके आसपास जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर का मानना है कि थिनर जैसे कैमिकल में ब्लॉस्ट के पीछे आर्द्रता की कमी है। कलेक्टर का कहना है कि कम आबादी वाली जगह होने की वजह से इस इलाके में छोटी छोटी फैक्ट्रियों के लिए उद्योग विभाग को जमीन दी गई थी। अब इन्हें कहीं और शिफ्ट किया जाएगा। 

Trending News

Related News