भोपाल News

राजनेता ही नहीं ..समाजसेवक भी थे अनिल माधव दवे

Last Modified - May 19, 2017, 9:03 am

केंद्रीय मंत्री अनिल दवे नहीं रहे अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका मौत होगी लेकिन मौत के साथ ही वो राजनीतिक हलकों में हलचल मचाकर चले गए. किसी को यकीन नहीं हो रहा कि जो शख्स कल तक उनके साथ था वो अचानक उन्हें छोड़कर चला गया.

आज केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली के एम्स में अपनी आखिरी सांस ली. उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था. अनिल माधव दवे का जन्म 6 जुलाई 1956 को जन्म उज्जैन के बड़नगर में हुआ था. दवे 2009 से भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. वो भारत सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री थे. 

इसके साथ साथ दवे कई कमेटियों के सदस्य भी रह चुके है. वो सूचना और प्रसारण मंत्रालय के जल संसाधन और कंसल्टिव कमेटी के सदस्य रहे. इसके अलावा मार्च 2010 से जून 2010 तक ग्लोबल वॉर्मिग और क्लाइमेट चेंज के पार्लियामेंट्री फोरम के भी सदस्य भी रहे. अनिल माधव दवे के आकस्मिक निधन से पूरा राजनीतिक कुनबा दुखी है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी. प्रधानमंत्री मोदी छत्तीगढ़ के CM रमन सिंह और मध्य प्रदेश के CM शिवराज के अलावा कई आला नेताओं दवे की मौत पर शोक जताया. दवे के निधन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.  

अनिल माधव दवे सिर्फ एक राजनेता नहीं थे वो एक समाजसेवक भी थे. उन्होंने ही सबसे पहले नर्दा का मुद्दा उठाया था. उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी में कई किताबें लिखी. उन्होंने हिंदी में सृजन से विसर्जन तक. चंद्रशेखर आजाद संभल के रहना घर में छुपे हुए गद्दारों से. नर्मदा समग्र और समग्र ग्राम विकास. तो आंग्रेजी में फ्रॉम अमरकंटक टू अमरकंटक और बियॉन्ड कॉपेनहेगन जैसी किताबें भी लिखी हैं. दवे की शख्सियत से हर कोई प्रभावित था.

 


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