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शिवराज कैबिनेट के फैसले, तीन नई सिंचाई परियोजना को मंजूरी

Last Modified - May 23, 2017, 8:53 pm

मंत्रि-परिषद् की बैठक आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में मंत्रालय में सम्पन्न हुई,पिछली कैबिनेट में तय हुआ था कि हर मंत्री अपने विभाग का रोडमेप प्रस्तुत करेंगे आज कृषि विभाग और उद्यानकी विभाग के रोड मैप का प्रजेंटेशन हो रहा है... -मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में यदि देश में प्रथम आ रहा है और लगातार "कृषि कर्मण अवार्ड" प्राप्त कर रहा है तो इसका श्रेय राज्य में बढ़ाई गई सिंचाई सुविधाओं को है। हर खेत तक पानी पहुंचा है, उत्पादन बढ़ा है और हमारे किसान भाई आर्थिक समृद्धि प्राप्त कर रहे हैं। अनेक नई सिंचाई योजनाएं बीते दशक में मंजूर हुई जिसके फलस्वरूप फसलों का उत्पादन बढ़ा है। मध्यप्रदेश सरकार निरंतर सूखा ग्रस्त क्षेत्रों को सिंचित बनाने के लिए प्रयास कर रही है। यह कार्य काफी तेजी से हो रहा है। इसी श्रृंखला में मंत्रि-परिषद् ने आज 3 सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है जो उन इलाकों का कायाकल्प कर देंगी, जहाँ आज सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी अभी नहीं है।

मंत्रि-परिषद् ने आज बीना संयुक्त सिंचाई एवं बहुउद्देशय योजना को मंजूरी प्रदान की। इसके लिए 3735.90 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान की गई। *सागर* और रायसेन जिले में इस परियोजना से क्रियान्वयन से 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। मंत्रि-परिषद् द्वारा आज खण्डवा जिले में आंवलिया मध्यम सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान की। परियोजना की लागत 165.08 करोड़ रुपये है। इस परियोजना से 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी सिंचाई संभव होगी। मंत्रि-परिषद् द्वारा आज शहडोल जिले की हिरवार सूक्ष्य सिंचाई नहर परियोजना की प्रशासकीय मंजूरी भी दी गई। इस परियोजना की लागत 116.78 करोड़ रुपये होगी। -मंत्रि-परिषद् ने आज आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम परिवर्तित कर जनजातीय कार्य विभाग करने का फैसला लिया। भारत सरकार में यह जनजातीय कार्य मंत्रालय के नाम से है। मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजाति के वर्ग के कल्याण के लिए गत 12-13 वर्ष में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस वर्ग को आदिम परिस्थितियों और जटिलताओं से बाहर निकालने का महत्वपूर्ण कार्य भी सरकार ने किया है। इस नाते आज के संदर्भ में आदिम शब्द के स्थान पर अधिक बेहतर शब्द जनजातीय जो सम्मान जनक भी है, लागू करने का निर्णय लिया गया है।

मंत्रि-परिषद् ने आज मुख्य तकनीकी परीक्षक (सर्तकता) संगठन भोपाल के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी शाखा स्थापित करने के लिए एक मुख्य अभियंता (सिविल) का पद सृजित करने की मंजूरी दी। -मंत्रि-परिषद् ने नक्सली ऑपरेशन में अपराधियों और असामाजिक तत्वों से निपटने में कानून व्यवस्था के दौरान घायल अथवा दिवंगत होने वाले पुलिस कर्मियों के लिए पेंशन नियम में संशोधन किया है। इसके अनुसार शहीद अथवा घायल पुलिस कर्मियों की पत्नी को पेंशन के रूप में उतनी ही राशि मिलती है जो पुलिस कर्मी के जीवित रहने पर वेतन के रूप में प्राप्त होती है। ऐसे प्रभावित परिवार समय-समय पर मंजूर महंगाई भत्ते और वेतन पुनरीक्षण का फायदा शहीदों की विधवाओं को नहीं मिल रहा था। मध्यप्रदेश पुलिस कर्मचारी वर्ग-असाधारण परिवार पेंशन नियम-1965 में स्पष्ट प्रावधान कर पुलिस कर्मियों के परिवारों का लाभ सुनिश्चित हो सकेगा। शहीद परिवारों को आर्थिक विषमताओं से बचाने के लिए उनके हित में नियम में संशोधन किए गए हैं।

मंत्रि-परिषद् ने मैदानी कार्यालयों में पदस्थ तृतीय और तृतीय संवर्ग के शासकीय सेवकों को उनके मूल पदस्थापना के कार्यक्षेत्र के अलावा अतिरिक्त अन्य समीपवर्ती कार्य क्षेत्र के समान अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने पर भत्ता अतिरिक्त भत्ता स्वीकृत करने का निर्णय लिया। यह भत्ता तृतीय श्रेणी के लिए 500 रुपये और चतुर्थ श्रेणी के लिए 300 रुपये होगा।

मंत्रि-परिषद् ने राज्य न्यायिक अकादमी जबलपुर के लिए विभिन्न कॉडर के 17 पद सृजित करने का निर्णय लिया। इससे अकादमी के कार्यों का सुचारू संचालन में आसानी होगी। -कर्मचारियों के डीए में हाल ही में की गई 7 फीसदी की बढ़ोतरी को कम कर 4 फीसदी किये जाने के प्रस्ताव का अनुसमर्थन -मप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश 2017 के जरिये व्हीआईटी भोपाल विवि सीहोर, सेज विवि इंदौर और रैनेसा विवि इंदौर की स्थापना एवं डीसी विश्वविद्यालय इंदौर का परिसमापन का प्रस्ताव मंजूर -नर्मदा घाटी विकास विभाग के कर्मचारी ए.एल ठाकुर और अन्य 55 के मामले में हाई कोर्ट जबलपुर द्वारा पारित निर्णय का अन्य प्रकरणों में अनुपालन का प्रस्ताव मंजूर बाईट-डॉ नरोत्तम मिश्रा प्रवक्ता राज्य सरकार।

 

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