News

मूवी रिव्यू: फिल्म 'राब्ता'

फिल्म- राबता

स्टारकास्ट- सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, जिम सरभ

निर्देशक- दिनेश विजन

 

स्टोरी- फिल्म की पूरी कहानी पुनर्मजन्म पर आधारित है, फिल्म में आपको नया कुछ भी देखने नहीं मिलेगा. कहानी एक पंजाबी दिल फेंक मुंडा शिव यानी कि सुशांत सिंह राजपूत की है जिसे हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट मे एक बैंकर की नौकरी मिल जाती है. वहां पर उसकी मुलाकात आयशा यानी कृति सैनन से होती है और फिर चंद मुलाकात के बाद दोस्ती प्रेम में तब्दील हो जाती है. बाद में शराब के व्यापारी जाकिर मर्चेंट के रोल मे जिम सरभ की एंट्री होती है और उसके बाद चीजें बदलने लगती है. आयशा मर्चेंट की तरह खिंचती चली जाती है और जब एक सप्ताह के लिए शिव वियना 

मे बैंकर्स कांफ्रेंस के लिये जाता है तब उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी होती है. पुनर्जन्म की बात यही से शुरू होती है.हालांकि फिल्म में सुशांत और कृति की केमिस्ट्री काबिले तारीफ है. इन दोनों ने रूपहले पर्दे पर पहली बार एक साथ अभिनय किया है और दोनों बेहद सहज नजर आते है.

अभिनय के मामले मे भी सुशांत सभी से उन्नीस नजर आते है अलबत्ता इमोशनल सींस मे कृति की कमजोरी दिखाई देती है. जिम सरभ की शुरुआत तो बड़े ही शानदार तरीके से होती है लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे ही उनका किरदार स्टीरियोटाइप्ड होते चला जाता है. राजकुमार राव भी फिल्म में है और मुमकिन है कि उनके मेकअप की वजह से आपको उनको पहचान नहीं पाएं. वो एक बूढ़े के किरदार में नजर आते है लेकिन उनकी धार इस फिल्म में दिखाई नही देती.

फिल्म के पहले हाफ मे सुशांत और कृति के बीच की नोकझोक काफी मजेदार है लेकिन सच ये भी है कि एक कहानी को भी साथ में आगे बढ़ाना है. दिनेश इसके बाद लड़खड़ा जाते है और 154 मिनट की ये फिल्म बोर करने लगती है और इंतजार इसी बात का रहता है कि आखिर ये फिल्म खत्म कब होगी. हद तब हो जाती है जब मध्यांतर के बाद पुनर्जन्म का सीक्वेंस शुरु होता है. इतिहास के किस युग में दिनेश हमको लेकर आए है ये आपको पता नहीं चल पाएगा. हां, एक बात पक्की है कि जमाना जो भी हो कबीले वालों की ड्रेसिंग सेंस कमाल की था.

अभिनय के मामले मे भी सुशांत सभी से उन्नीस नजर आते है अलबत्ता इमोशनल सींस मे कृति की कमजोरी दिखाई देती है. जिम सरभ की शुरुआत तो बड़े ही शानदार तरीके से होती है लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे ही उनका किरदार स्टीरियोटाइप्ड होते चला जाता है. राजकुमार राव भी फिल्म में है और मुमकिन है कि उनके मेकअप की वजह से आपको उनको पहचान नहीं पाएं. वो एक बूढ़े के किरदार में नजर आते है लेकिन उनकी धार इस फिल्म में दिखाई नही देती.

फिल्म के पहले हाफ मे सुशांत और कृति के बीच की नोकझोक काफी मजेदार है लेकिन सच ये भी है कि एक कहानी को भी साथ में आगे बढ़ाना है. दिनेश इसके बाद लड़खड़ा जाते है और 154 मिनट की ये फिल्म बोर करने लगती है और इंतजार इसी बात का रहता है कि आखिर ये फिल्म खत्म कब होगी.

Trending News

Related News