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मूवी रिव्यू: फिल्म 'फुल्लू'

Last Modified - June 17, 2017, 6:47 pm

फिल्म- फुल्लू

कलाकार- शारिब अली हाशमी, ज्योति सेठ, नूतन सूर्या, इमानुल हक 

निर्देशक- अभिषेक सक्सेना

 

फुल्लू पहली फिल्म है जो महिलाओं के मासिक धर्म पर बनाई गई है. कई बॉलीवुड फिल्मों के सीन्स में महिलाओं की माहवारी का ज़िक्र हुआ है लेकिन इस सब्जेक्ट पर किसी ने फिल्म नहीं बनाई। तारीफ करनी होगी इस फिल्म के निर्माताओं की, जिन्होंने ऐसे अहम सब्जेक्ट पर पूरी ईमानदारी के साथ फिल्म बनाई। यह फिल्म महिलाओं को फोकस करके बनाई गई है

कहानी-

फुल्लू (शारिब अली हाशमी) एक छोटे से गांव में अपनी मां और बहन के साथ रहता है। फुल्लू कोई कामकाज नहीं करता। लेकिन जब कभी गांव से दूर शहर जाता है, तो गांव में रहने वाली महिलाएं उससे अपनी जरूरत का सामान मंगवाती हैं। वह कभी किसी को ना नहीं कहता। 

फुल्लू की मां उसकी शादी बिगनी (ज्योति सेठी) के साथ कर देती है। एक दिन फुल्लू जब शहर सामान लेने आता है तो उसे पहली बार माहवारी के दौरान उपयोग में आने वाले सेफ्टी पैड के बारे में पता चलता है। एक मेडिकल हाउस में वह लेडी डॉक्टर को महिलाओं को इसके बारे में बताते हुए सुनता है। 

फुल्लू को लगता है गांव में रहने वाली सभी महिलाओं को इस पैड के बारे में जागरूक करना चाहिए और उन्हें बहुत कम कीमत पर पैड उपलब्ध भी कराए जाने चाहिएं। फुल्लू शहर में आकर पैड बनाना सीखता है। जब वह सीखकर गांव लौटता है, तो उसकी मां और बहन ही उसके इस काम से खुश नहीं होते। लेकिन बिगनी को भरोसा है एक दिन उसका पति अपने इस नेक मकसद में कामयाब ज़रूर होगा। 

फुल्लू के किरदार में शारिब हाशमी छा गए। इमानुल हक कम फुटेज होने के बावजूद अपनी पहचान छोड़ने में कामयाब रहे। ज्योति सेठ और नूतन सूर्या ने अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया। 


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