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खत्म हो सकता है रेलवे का इमरजेंसी कोटा, चर्चा तेज 

 

कुछ दिनों से ये खबर सोशल मीडिया और चर्चा में छाई हुई है कि रेलवे अब अपना इमरजेंसी कोटा खत्म करेगा। इस कोटे की सीट भी तत्काल या प्रीमियम तत्काल में शिफ्ट कर दी जाएगी और इसे भी बेचा जाएगा, हालांकि इस बात का जोरदार विरोध हो रहा है। इसी तरह रेल मंत्री से तत्काल टिकिट के कैंसिलेशन पर भी रिफंड की मांग की गई है। नरेंद्र मोदी सरकार ने लाल बत्ती हटाकर संकेत दे दिए हैं, कि वे वीआईपी कल्चर पर रोक लगाएंगे। इसी सिलसिले में दिल्ली से लेकर पूरे देश में ये चर्चा जोरों पर है कि सांसद, विधायक, मंत्रियों और दूसरे वीआईपी को रेलवे के आरक्षण के लिए मिलने वाला वीआईपी कोटा खत्म कर दिया जाएगा।

दरअसल रेलवे के इस इमरजेंसी हेडक्वार्टर कोटे के सिर्फ वीआईपी को मिलने के बाद इसका नाम ही वीआईपी कोटा हो गया है। इस कोटे की सीट मिलनी चाहिए जरूरतमंद यात्रियों को, लेकिन इसे अलाट किया जाता है वीआईपी के लेटरहेड पर, एसे में इस कोटे को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। अब इस कोटे को ही खत्म करने की बात चल रही है। रेलवे ने सभी ट्रेनों में डिविजनल हेडक्वार्टर, जोनल हेडक्वार्टर और बड़े स्टेशनों के आधार पर इमरजेंसी कोटा तय किया है जो कि ट्रेन की कुल बर्थ का 15 फीसदी तक होता है। इसे अलग अलग स्टेशनों में बांटा गया है। अब इस कोटे को रेलवे अपनी कमाई का जरिया बना रहा है, हालांकि अभी तक ऐसा कोई आफिशियल सर्कुलर रेलवे के पास नहीं आया है, लेकिन चर्चा रेलवे हल्कों में भी है। 

उधर इसी चर्चा के साथ एक और बदलाव की जानकारी है कि हर ट्रेन की कुल सीटों का 25 फीसदी बर्थ का जो तत्काल कोटा है उसके टिकिट कैंसिलेशन पर पचास फीसदी राशि वापस मिलेगी। रेलवे कह रहा है कि इसकी कोई अधिकारिक जानकारी नहीं आई है, लेकिन इसे लेकर भी कवायद जारी है। अभी तक तत्काल कोटे की टिकिट कैंसिल कराने पर एक रुपए भी रिटर्न नहीं मिलता, लेकिन सैकड़ों यात्रियों ने तत्काल टिकिट कैंसिल कराने पर रिटर्न की मांग की है...लोगों का कहना है कि इमरजेंसी कोटा खत्म कर रेलवे उसे कमाई का जरिया ना बनाए और तत्काल टिकिट के कैंसिलेशन का आधा पैसा वापस किया जाए। 

दरअसल जिस तेजी के साथ रेलवे खुद को कमर्शियल कर रहा है, उसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आने वाले समय में इमरजेंसी कोटा खत्म कर दिया जाए या फिर तत्काल, तत्काल प्रीमियम जैसे किसी नाम से इमरजेंसी कोटे की टिकट पर भी कोई शुल्क लगा दे। रेलवे को इमरजेंसी कोटे पर शुल्क लगाने से ज्यादा इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए, कि इमरजेंसी कोटा उन्हीं लोगों को मिले जिन्हें वाकई जरूरत है। रेलवे के अधिकारी, कर्मचारी और दलाल मिलकर इन टिकट से मुनाफा ना कमाएं।

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