छतरपुर News

कुदरत का खेल निराला ..बकरा वो भी दूध देने वाला

Last Modified - July 15, 2017, 4:26 pm

सावन के महीने में शंकर भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए छतरपुर में लोग भोलेनाथ को बकरे का दूध चढ़ा रहे हैं. चौंकिए मत, ये सच है. सावन का पावन महीना चल रहा है. महादेव को जल और दूध चढ़ाने के लिए शिवालयों में दूर-दूर से श्रद्धालू आते हैं लेकिन छतरपुर का एक गांव ऐसा है जहां गांव के लोग बकरे के दूध से भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं. चौंक गए न आप.. जी हां बात अजीब है लेकिन है सच.

दूध देने वाले ऐसे अजब-गजब बकरे से मिलने चलिए आपको ले चलते है छतरपुर से बीस किमी दूर बासाटा गांव. बसाटा गांव के रहने वाले गुलाब यादव ने देवी के मंदिर में इस विशाल बकरे को देखा था और फिर वो इसे अपने घर ले आए और उसकी सेवा करने लगे और फिर पता चला कि बकरा दूध भी देता है. 

अजूबो से भरी दूनिया में ये एक और अजूबा है. तो चलिए आपको इस अजब-गजब बकरे की खासियत बताते हैं.  बकरे का वजन 100 किलो है. दो साल की इसकी उम्र है और ये पूरे बारह महीने दूध देता है. इसके दूध को सिर्फ भगवान पर चढ़ाया जाता है. बकरे के दूध को पीने के लिए उपयोग नही किया जाता. लोग भी हैरानी से देखते है इसे.

मेडिकल साइंस के जमाने में डाक्टरों की इस बकरे के बारे में अपनी अलग राय है.  वहीं यादव परिवार इस बकरे को दैवीय रुप मानकर पूजता है और अब ये बकरा उनके जिगर का टुकड़ा बन चुका है. कुदरत का भी खेल निराला है.. बकरा वो भी दूध देने वाला..आश्चर्य किंतु सत्य.


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