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मूवी रिव्यू: 'जग्गा जासूस'

Created at - July 15, 2017, 6:40 pm
Modified at - July 15, 2017, 6:40 pm

कास्ट: रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ, शाश्वत चटर्जी, सौरभ शुक्ला

निर्माताः सिद्धार्थ रॉय कपूर, अनुराग बसु, रणबीर कपूर

निर्देशकः अनुराग बसु

 

फिल्म की कहानी एक अनाथ और हकले बच्चे जग्गा ( रणबीर कपूर) की है, जिसे एक हॉस्पिटल की नर्स ने पाला था। बचपन से जासूसी का शौक रखने वाले जग्गा की जिंदगी हॉस्पिटल में आए एक मरीज बादल बागची उर्फ टूटी-फ्रूटी (शाश्वत चटर्जी) से मिलकर बदल जाती है। वह न सिर्फ उसे गाकर अपनी बात बोलना सिखाता है, बल्कि उसे हॉस्पिटल से उसे अपने घर भी ले जाता है। दोनों हंसी-खुशी अपनी जिंदगी बिता रहे थे, लेकिन एक दिन पुलिस ऑफिसर सिन्हा ( सौरभ शुक्ला) उनके घर पर छापा मारता है। उसे देखकर बागची जग्गा को लेकर भाग जाता है और उसका ऐडमिशन मणिपुर के एक बोर्डिंग स्कूल में करा देता है। 

जग्गा तेज तर्रार है, लेकिन बोलने में हकलाता है. उसके पिता ने उसे समझाया था कि अगर वो गाकर अपनी बात बोलेगा तो नहीं हकलाएगा और यही से जग्गा को परेशानी का हल मिलता है. साथ ही नींव पड़ती है एक म्यूजिकल फिल्म 'जग्गा जासूस' की. वक्त गुजरता है जग्गा बड़ा हो जाता है और बगची वापस नहीं लौटता, इधर जग्गा को हर बात की गहरायी में जाने की आदत पड़ जाती है और इन्हीं सब के चलते वो अपने स्कूल में एक हत्या का केस सुलझता है. अब उसे अपने खोए हुए पिता का पता लगाना है और वह राज जानना है जिसकी वजह से उसके पिता गायब हुए. कविता-गीतनुमा संवादों का प्रयोग अपनी जगह है परंतु फिल्म की कहानी झोल-झाल से भरी है, जिसमें जीरो एंटरटेनमेंट है। फिल्म के निर्देशन में लेखक-निर्देशक अनुराग बसु पूरी तरह दिशाहीन नज़र आए

 


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