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कर्ज लेकर बेटी को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भेजा, बेटी गोल्ड लेकर लौटी

 

बेटी को आत्म रक्षा के गुर सीखने के लिए एक पिता ने कर्ज लेकर बेटी को ऐसा गुर सिखवाया की बेटी ने भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी विधा का कमाल दिखाकर गोल्ड मैडल जीता और पिता के साथ साथ देश का नाम भी ऊंचा कर दिया। देश का नाम ऊंचा करने वाली प्रियंका बैतुल जिला मुख्यालय के अर्जुन नगर हमलापुर इलाके की रहने वाली है जिसने हाल ही में आयोजित 56 किग्रा में अंतरराष्ट्रीय स्तर की आगरा में हुई करते स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है। प्रियंका ने स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में ब्राजील की खिलाड़ी डायनी गूंज को 10-17 से एकतरफा शिकस्त दी। ब्राजील की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल अपने देश के नाम कर लिया।

एंजिल स्कूल में कक्षा दसवीं में पड़ने वाली प्रियंका की माने तो पिता ने आत्म रक्षा के लिए कराते का गुर सिखवाय उनका सपना है कि मैं ओलंपिक में हिस्सा लू ओर देश के लिए मैडल जीत कर देश का नाम रोशन कर इस बार मैंने आगरा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता में पहला मुकाबला चायना की खिलाड़ी रिंग ही हेन से हुआ। जिसमे कड़ी टक्कर देते हुए यह मुकाबला 7-8 से जीत लिया। स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में ब्राजील की खिलाड़ी डायनी गूंज को 10-17 से एकतरफा शिकस्त दी। ब्राजील की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल अपने देश के नाम कर लिया। अब मेरा सपना ओलंपिक में भाग लेने का है जिसके लिए मैं कड़ी मेहनत करूंगी।

दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले प्रियंका के पिता और उसकी माँ की माने तो बेटी को आत्म रक्षा के लिए कराते के गुर सिखवा रहे है ताकि वो आत्म निर्भर बन सके बेटी को यह विधा सिखाने के लिए कर्ज भी लेना पड़ा लेकिन उसका कोई गम नही है प्रियंका को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए अब तक साहूकार से देड़ से दो लाख का कर्ज ले लिया लेकिन अब बेटी ने गोल्ड मैडल जीतकर उनको कर्ज की फिक्र से मुक्त कर दिया। कर्ज तो आज नहीं कल चुका दूंगा आज तक सरकार या सरकारी अधिकारियांे ने कोई मदद नहीं की।

अब बेटी को ओलंपिक में भाग लेने के लिए भेजना है। चाहे घर ही क्यों न बेचना पड़े वो भी बेच कर बेटी को भेजूंगा। प्रियंका की सहेलियों भी प्रियंका की इस कामयाबी पर मोहल्ले वालों और प्रियंका के परिजनों के साथ जश्न मनाते हुए नजर आ रही है वो भी अब प्रियंका के जैसी कामयाबी हासिल करने के लिए कराते जैसी हुनर सीखना चाहती है । प्रियंका जैसी प्रतिभावान छात्रा को अगर सरकार की ओर से थोड़ी भी मदद मिल जाती है तो शायद आने वाले ओलम्पिक में प्रियंका एक गोल्ड मैडल देश के नाम कर सकती है।

 

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