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धरती पर स्वर्ग 'जम्मू-कश्मीर'

Created at - June 5, 2015, 11:20 pm
Modified at - June 5, 2015, 11:20 pm

जम्मू-कश्मीर की सुंदरता अनुपम है। यहां आने वाले लोग यहां की खूबसूरती को देखकर ठिठक जाते हैं। उन्हें होश नहीं रहता, बस लगता है कि अगर जन्नत किसी जगह का नाम है, तो वो बस यही है। जाड़े का मौसम हो, या फिर गर्मी का, यहां सालोंभर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। हर मौसम में यहां अलग तरह की खूबसूरती देखने को मिलती है। प्राकृतिक सुंदरता ईश्वर ने इसे जी खोलकर दी है। राज्य में यूं तो कई पर्यटन स्थल हैं जहां जाने की चाहत हर आने वाले पर्यटक की होती है। लेकिन गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम और पटनीटाप जाए बिना शायद ही कोई रह पाता हो। इनमें से पहले तीन तो कश्मीर वादी में अलग-अलग दिशाओं में हैं तो चौथा पटनीटाप जम्मू संभाग में कश्मीर की ओर जाते हुए रास्ते में पड़ता है।सबसे पहले बात करते हैं गुलमर्ग की। यह कश्मीर संभाग के बारामूला जिले में स्थित है। यह श्रीनगर से 57 किलोमीटर की दूरी पर है। यात्री बस से श्रीनगर से गुलमर्ग दो घंटों में पहुंचा जा सकता है। गुलमर्ग में स्कीइंग, गोल्फ कोर्स, विश्व की सबसे ऊंची केबल कार और ट्रैकिंग के अलावा सूफी संत बाबा ऋषि की दरगाह है। अगर गुलमर्ग कश्मीर आने वालों की जान है, तो सोनमर्ग को दिल जरूर कहा जा सकता है। समुद्र तल से 2,730 मीटर की ऊंचाई पर कश्मीर संभाग में स्थित सोनमर्ग सुंदरता के मामले में अपनी मिसाल आप है। सोनमर्ग में राज्य पर्यटन के होटल और हट हैं। इसके अलावा वहां पर निजी होटलों की भी भरमार है। यहां पर घूमने से पहले श्रीनगर में पर्यटन अधिकारी से वहां के मौसम की जानकारी जरूर हासिल कर लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त जिला अनंतनाग में स्थित पहलगाम श्रीनगर से लगभग साठ किलोमीटर की दूरी और समुद्र तल से 2,130 मीटर ऊंचा है।पहलगाम को बॉलीवुड के कारण पहचान मिली है, क्योंकि इसके आसपास स्थित अरू वैली तथा बेताव वैली में कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है और अमरनाथ की यात्रा का परंपरागत रास्ता भी यहीं से है। लिद्दर नदी के दोनों ओर बसे पहलगाम की सुंदरता अपनी मिसाल आप है। यहां पर घुड़सवारी, ट्रैकिंग, गोल्फ, फिशिंग आदि की पूरी सुविधा है। इन सबके बीच अगर पटनीटाप की बात न करें तो जम्मू- कश्मीर आने का मकसद शायद ही पूरा हो पाए। जम्मू से 108 किलोमीटर की दूरी पर जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर स्थित यह विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। घने देवदार और चीड़ के पेड़ो से घिरा और समुद्रतल से 2004 मीटर ऊँचा पटनीटाप जमीन पर स्वर्ग का अहसास करवाता है।


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