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सात साल के मासूम को जंजीरों से बांधकर रखते है मां-बाप

Last Modified - August 15, 2017, 8:45 pm

 

आजाद भारत मे गुलामों की तरह जकडा सात साल का मासूम नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र के टूईयापानी गांव है जिसे उसके ही माता पिता ने पिछले पांच सालों से रस्सियों से कैद करके रखा है पर अब ये सवाल भी उठना लाजमी है कि कोई भला अपने ही कलेजे के टुकड़े को क्यों यू कैद करेगा तो अब आप इसके पीछे की वजह भी सुन लीजिए दरसल मासूम दीपक अज्ञात बीमारी से ग्रसित है गरीबी में बसर कर किसी तरह दो वक्त की रोटी कमाने वाले माता पिता के पास इतना पैसा नही की वो अपने इस कुल के चिराग का इलाज करा सके और उसे आजादी की खुली सांस दे सके क्योंकि जब जब परिजनों ने उसे कैद से आजाद किया तो कभी उसने खुद को ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कभी घर से भागने का प्रयास तो कभी जानलेवा घटनाओं का कोशिश।

मासूम दीपक के पिता टूटी झोपड़ी में रहकर जीवनयापन करते है पर बीपीएल कार्ड होने के बावजूद शायद सरकारी मदद उनके झोपड़े में आने के पहले ही दम तोड़ देती है वोट मांगकर चुनाव जीतने वाले स्थानिया विधायक से लेकर प्रशासनिक अफसर तक गुहार लगाने के बाद भी पिता को जब बेटे के इलाज के लिए कोई मदद नही मिली तो उसे कैद करना ही उनकी मजबूरी बन गई। पिता कहते है डॉक्टरों को दिखाने पर बेटे को मानसिक विक्षित बताया गया है हम खुद किसी तरह जीवन यापन कर रहे है उसके इलाज के लिए बहुत पैसा चाहिए है हर जगह से निराश हो चुके है न कभी विधायक आते है न सांसद कभी कोई सरकारी मदद भी नही मिलती बेटे को खुला रखो तो वो पत्थर मरता है कभी नदी में कूद जाता है कभी कुछ भी खा लेता है हम भी मजबूर है।

वहीं मां कहती है क्या करें हम खुद मजबूर है हमारे पास खाने को भी कुछ नही तो इलाज के लिए कहा से पैसा लाये सरपंच ने कार्ड बनवा दिया तो अब राशन भर मिलता है पर इलाज के लिए कोई मदद नही मिलती।

स्थानीय स्तर पर तो सरपंच अपनी सीमा तक मदद कर ही रहे है पर उसे महंगे इलाज की जरूरत है जो विधायक स्वेक्षा अनुदान या फिर दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत ही हो सकता है पर न प्रशासन उनकी कोई सुध लेता है न जनप्रतिनिधि ।

 


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