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मूवी रिव्यू: 'बाबूमोशाय बंदूकबाज़'

फिल्म- 'बाबूमोशाय बंदूकबाज़'

कलाकार- नवाजुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बाग,श्रद्धा दास, जतिन गोस्वामी, दिव्या दत्ता और अनिल जॉर्ज 

निर्देशक- कुशन नंदी

 

कहानी: बाबू (नवाजुद्दीन) 10 साल की उम्र से ही हत्याएं करने का काम कर रहा है। पहली हत्या उसने खाने के लिए की थी। बांके बाबू का फैन है और वह सुपारी किलर बनने का सपना देखता है। बांके की गर्लफ्रेंड यास्मीन (श्रद्धा) बॉलिवुड रीमिक्स पर डांस करती है और उसके लिए कॉन्ट्रैक्ट लाती है। बाबू की गर्लफ्रेंड फुलवा (बिदिता) उसे खत्म कर देने के लिए कहती है। पूरी फिल्म में आपको गोलियों की आवाज सुनाई देगी। 

फिल्म में दो और किरदार हैं, सुमित्रा ( दिव्या) और दुबे (अनिल)। दोनों नेता की भूमिका में हैं और अपने फायदे के लिए इन दोनों बंदूकबाजों का इस्तेमाल करते हैं। इस खेल में स्थानीय पुलिस भी शामिल हो जाती है। बाबू अपनी गर्लफ्रेंड फुलवा के साथ मजे में रह रहा होता है लेकिन बांके की उस पर नजर पड़ती है और वह भी फुलवा की तरफ आकर्षित हो जाता है। 

स्क्रीनप्ले थोड़ी और टाइट करने की गुंजाइश थी। इसके बावजूद कुशन नंदी ने अच्छी फिल्म बनाई है। नवाजुद्दीन का एक खतरनाक किलर से प्रेमी में ट्रांसफॉर्म होना भी देखते ही बनता है। जतिन ने भी प्रभावित किया है और उनकी आवाज स्क्रीन अपील को बढ़ाती है। 

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