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निकला तीर हाथ से, अब शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता भी होगी रद्द

Created at - September 13, 2017, 12:20 pm
Modified at - September 13, 2017, 12:20 pm


जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दो-दो हाथ कर रहे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शरद यादव को दोहरा झटका लगा है। शरद यादव ने चुनाव आयोग में जदयू के असली दावेदार होने का दावा किया था, लेकिन आयोग ने इसे खारिज करते हुए नीतीश के नेतृत्व वाले खेमे को असली जदयू बताया है। इसके साथ ही अब ये भी तय हो गया है कि शरद यादव को बहुत जल्दी राज्यसभा की सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ेगा क्योंकि अभी तक वो जदयू सांसद के तौर पर ही सदन में हैं। राज्यसभा सचिवालय ने शरद यादव और अली अनवर से एक हफ्ते के भीतर सदस्यता रद्द करने के मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है। शरद यादव ने राज्यसभा सभापति से ये कहा था कि जबतक चुनाव आयोग में मामला लंबित है, उनकी सदस्यता को लेकर निर्णय नहीं किया जाना चाहिए।

 

सांसद अनवर अली सस्पेंड 


जनता दल यू के महासचिव और प्रवक्ता के सी त्यागी ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने में कोई अड़चन बाकी नहीं रह गई है। के सी त्यागी ने कहा कि शरद यादव और अली अनवर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं और इसे देखते हुए जदयू ने उनकी राज्यसभा सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया था। आपको बता दें कि बिहार में जदयू ने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन बनाया था, जिसने चुनाव में विपक्षी गठबंधन एनडीए को हराकर सत्ता हासिल की थी। बाद में जदयू ने महागठबंधन से अलग होकर एनडीए के साथ हाथ मिला लिया, इसी को लेकर शरद यादव नाराज चल रहे हैं। शरद यादव का कहना है कि जनादेश महागठबंधन को मिला था, इसलिए नीतीश कुमार ने जनादेश के साथ धोखा किया है। शरद यादव ने जदयू में रहते हुए ही 27 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में हुई राजद की रैली में भाग लिया था, इसी के बाद जदयू ने 5 सितंबर को राज्यसभा के सभापति से मिलकर शरद यादव और अली अनवर की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी।


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