News

बस्तर की बिसात में कौन मारेगा बाजी? यहां जीत से मिलती है सत्ता की चाबी

Last Modified - January 22, 2018, 3:39 pm

स्तर में जीत के साथ ही छत्तीसगढ़ की सत्ता का द्वार खुलता है. शायद यही वजह है कि बस्तर इन दिनों अचानक ही सियासी गतिविधियों के केंद्र में आ गया है । सारी पार्टियां इस आदिवासी बहुल इलाके की ओर कूच कर रही हैं. इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह ने तीन दिनों के लिए बस्तर में डेरा डाल दिया है. 

ये भी पढ़ें- मुंबई के कमला मिल में भीषण आग से 14 लोगों की मौत

       

ये भी पढ़ें- सीजी पीएससी 2016 का रिजल्ट जारी,परीक्षा में बेटियों ने मारी बाजी

छत्तीसगढ़ में भले ही चुनाव करीब साल भर बाद हो लेकिन उससे पहले ही पार्टियों के बीच जोर आजमाइश शुरु हो गई है प्रदेश में बीजेपी तीसरी पारी खेल रही है और चौथी बार सरकार बनाने के लिए आतुर है. लेकिन इस बार उसके सामने कड़ी चुनौती कांग्रेस ही नहीं बल्कि कांग्रेस से टूटकर बनीं जोगी कांग्रेस भी है और इस बार बीजेपी के लिए ये राह इसलिए भी आसान नहीं है क्योंकि बीजेपी को चौथी बार सरकार बनाने के लिए बस्तर को साधना पड़ेगा.

       

ये भी पढ़ें- पीएससी का रिजल्ट मेरे पापा को समर्पित है -अर्चना पांडेय

क्योंकि यहीं से मिलती है सत्ता की चाभी. इसी के मद्देनजर बीजेपी ने अभी से बस्तर पर फोकस करना शुरू कर दिया है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 28 से 30 दिसंबर तक राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह तीन दिनों तक बस्तर में डेरा डालेंगे और सभी 12 विधानसभा सीटों की बूथों की समीक्षा करेंगे. इस दौरान वे जगदलपुर के अलावा कोंडागांव और नारायणपुर में पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक भी लेंगे। सौदान सिंह के साथ संगठन महामंत्री पवन साय और प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक सहित कई मंत्री भी उनके साथ बस्तर दौरे में मौजूद रहेंगे. इसकी शुरूआत गुरुवार को कोंडागांव जिले से हुई। 

       

कांग्रेस की बात करें तो. छले चुनाव में कांग्रेस ने यहां बीजेपी पर बढ़त हासिल की थी. उसे 12 में से 8 सीटें मिली. जबकि बीजेपी को महज 4 ऐसे में 2018 के लिए उनकी उम्मीदें बढ़ी हुई हैं. 

ये भी पढ़ें- केरल के एर्नाकुलम स्थित आदिशंकराचार्य के शरण में शिवराज

आदिवासी परंपरागत कांग्रेसी वोटर रहे हैं. कांग्रेस अपने इस वोट बैंक को फिर से हासिल करना चाहती है । कुछ महीने पहले राहुल गांधी ने बस्तर दौरा कर अपने कार्यकर्ताओं को यही संदेश देने की कोशिश की थी. उसी वक्त तय हो गया था कि बस्तर संभाग की पूरी सीटों को जीतने के लिए राहुल गांधी के फार्मूला को अपनाया जाएगा।

ये भी पढ़ें- सतना में 300 से ज्यादा लापता बच्चों का नहीं मिला सुराग

इसी कड़ी में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया भी लगातार बस्तर में नक्सली घटना,मानवधिकार हनन और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर आदिवासियों के साथ मिलकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे है । कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि इन मुद्दों को अपनी जीत में तब्दील की जाए। दरअसल बस्तर में जनाधार का मतलब है. पूरे आदिवासी समुदाय का समर्थन हासिल होना. सियासी पार्टियां में तो तगड़ी होड़ लग गई है लेकिन अब सवाल ये है कि खुद बस्तर किस दल को टिकने की ज़मीन देने वाला है? 

 

वेब डेस्क, IBC24

 


Download IBC24 Mobile Apps

Trending News

IBC24 SwarnaSharda Scholarship 2018

Related News