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10 का सिक्का नहीं लिया तो देना होगा 20 हजार

Last Modified - November 7, 2017, 1:49 pm

जिस वक्त नोट बंदी  को लेकर सरकार ने अचानक घोषणा की है तब से  छत्तीसगढ़ में भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों और कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. कोई अचानक से अफवाह फैला दिया की अब दस के सिक्के भी बंद होने और उसके बाद छोटी छोटी दुकानों से लेकर बड़े  दुकानदार भी सिक्के लेने से बच रहे है। जब हम सब्जी लेने या छोटी किराने की दुकान में पहुंचे तो उन्होंने साफ कहा हम इसे नहीं ले सकते आप चाहे तो हमें कल पैसे दे दीजिये हमारे लाख  समझाने पर भी दुकानदार कुछ सुनने को तैयार नहीं और 10 रुपए का सिक्का वे ये कहकर लेने से मना कर रहे हैं कि RBI ने इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.
लेकिन उनकी कही ये बात सच नहीं है आपको  जानकारी के लिए बता दें कि 10 रुपए का सिक्का अगर कोई भी लेने से मना करता है, तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है. दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, 10 रुपए का सिक्का भारतीय मुद्रा है और इसे लेेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है.भारतीय रिजर्व बैंक ने साफ किया था कि बाजार में चल रहा कोई भी सिक्का अमान्य नहीं है और सभी सिक्के चलन में हैं. ये समय-समय पर जारी किए गए अलग-अलग डिजाइनों के सिक्के हैं.RBI ने कहा था कि शेरावाली की फोटो वाला सिक्का, संसद की तस्वीर वाला सिक्का, बीच में संख्या में 10 लिखा हुआ सिक्का, होमी भाभा की तस्वीर वाला सिक्का, महात्मा गांधी की तस्वीर वाला सिक्का सहित अन्य सभी सिक्के मान्य हैं. इन सिक्कों को विशेष मौकों पर जारी किया गया है. यहाँ बताना जरुरी है  कि 10 का सिक्का 26 मार्च 2009 को जारी हुआ था.छत्तीसगढ़ के आभूषण जिनकी खनक आज भी बरकरार है
यहां तक कि जो भी 10 रुपए का सिक्का लेने से इनकार करता है, उसके खिलाफ IPC की धारा 124 (1) के तहत मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है. आपने अगर ध्यान से भारतीय मुद्रा देखी हो, तो आपको पता चलेगा कि इस पर भारत सरकार वचन देती है. किसी भी भारतीय मुद्रा का अपमान करने पर पुलिस FIR दर्ज कर कोर्ट से सजा दिला सकती है. ये IPC की धारा 498 ए और 498 ई के तहत भी अपराध है और इसके तहत 17 साल की सजा और 20 हजार रुपए का जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है.

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गौरतलब है कि आरबीआई ने सभी बैंकों सहित व्यापारिक संगठनों को भी इस बारे में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे.चैंबर ऑफ कॉमर्स छत्तीसगढ़ ने कहा है  कि उनकी ओर से लगातार कारोबारियों को जागरुक किया जा रहा है. उन्हें बताया जा रहा है कि 10 रुपए का सिक्का पूरी तरह से भारतीय मुद्रा है और चलन में है और इसे लेने से इनकार नहीं करना है.उन्होंने कहा कि छोटे-बड़े व्यापारियों को बताया गया है कि अगर कोई भी बैंक मना करता है 10 रुपए के सिक्के को लेने से, तो चैंबर ऑफ कॉमर्स को इस बारे में बताया जाए, ताकि वे बैंक के उच्चाधिकारियों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को इसकी शिकायत कर सकें.

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नोटबंदी ने फ़ैलायी अफवाह
दरअसल पिछले साल 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर कर दिया गया था. पता नहीं उसी समय ये अफवाह भी कहां से फैली कि 10 रुपए के सिक्के को भी चलन से बाहर कर दिया गया है. इसके बाद पुलिस-प्रशासन और RBI ने इस बारे में बार-बार ये साफ किया कि 10 रुपए का सिक्का चलन में है और ये पूरी तरह से भारतीय मुद्रा है, उसके बावजूद दुकानदार इसे लेने से लगातार मना करते रहे हैं.

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