मूवी रिव्यू -करीब करीब सिंगल

Reported By: Renu Nandi, Edited By: Renu Nandi

Published on 10 Nov 2017 12:08 PM, Updated On 10 Nov 2017 12:08 PM

 रेटिंग 3 .5 / 5

टाइप -रोमांटिक कॉमेडी 

अवधि 2 घंटा 10 मिनट

 तनुजा चंद्रा फिल्म  इंडस्ट्री की  चर्चित नामी डायरेक्टर्स की लिस्ट में शामिल होती है,जिन्हे  बॉक्स आफिस की परवाह कभी नहीं रही। कभी भट्ट कैंप के लिए तमन्ना, संघर्ष, दुश्मन जैसी बेहतरीन फिल्में बना चुकी तनुजा ने इस बार लंबे गैप के बाद जब इस फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली तो तभी यह साफ हो गया है कि यह फिल्म भी तनुजा की पिछली फिल्मों की तरह बॉलीवुड मसाला फिल्मों की भीड़ से दूर हटकर है ये बात पक्की है  फिल्म दर्शकों के सामने है जिसे देखकर एक बार जेहन में कमल हासन, रति अग्निहोत्री की 'एक दूजे के लिए' फिल्म की  याद जरूर आती है. दरअसल, तनुजा की इस फिल्म में भी एक नॉर्थ इंडियन और साउथ इंडियन की प्रेम कहानी है। अब यह बात अलग है कि तनुजा ने इस कहानी को बिल्कुल अलग अंदाज में पिछली दोनों फिल्मों से हटकर पेश किया है।अपनीसिपंल लव और अलग टाइप की कहानी को इन लोकेशन तक मेन किरदारों की जर्नी को पहुंचाना ही इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बन गई है.जो दर्शक खींचने में मदद कर रही है। 

फिल्म कहानी: जया (पार्वती) दक्षिण भारतीय है और उसकी उम्र अब करीब पैंतीस साल की है। कुछ साल पहले उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। सिंगल जया अब कई साल के बाद अपनी जिदंगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए लाइफ पार्टनर की तलाश में है। जया की पसंद दूसरों जैसी नहीं है, उसे अपने व्यवहार को समझने वाला ऐसा लाइफ पार्टनर चाहिए जो कुछ-कुछ उसके जैसा हो। जया ने अपना प्रोफाइल एक साइट पर डाली हुई है लेकिन उसे अपनी साइट से अक्सर कुछ ऐसे घटिया रिस्पॉन्स मिलते रहते है लेकिन जया को इनकी परवाह नहीं। इसी बीच जया को अपनी प्रोफाइल पर योगी (इरफान खान) का प्रोफाइल भी मिलती है। योगी की उम्र भी जया के आसपास है। योगी मनमौजी और अपनी बसाई दुनिया में फुल मस्ती के साथ जीने वाला इंसान है। योगी एक कवि है लेकिन उसकी पहचान नहीं बन पाई है। योगी की प्रोफाइल देखने के बाद जया उससे मिलने का फैसला करती है। योगी अतरंग और बहुमुखी है, अपने अंदर कुछ भी रखना उसे गवारा नहीं सो वह अपने दिल की हर बात जया को बेहिचक कह देता है। जया उस वक्त हैरान होती है जब योगी उसे अपनी पिछली प्रेमिकाओं के बारे में पूरी ईमानदार के साथ बताते हुए जया को उनसे अपने साथ मिलने जाने का न्यौता भी देता है। योगी के स्टाइल और उसकी सोच को देखकर जया हैरान है। योगी उसे जब अपनी प्रेमिकाओं से मिलने के लिए अपने साथ ऋषिकेश, अलवर और गंगटोक साथ चलकर मिलने और उनसे अपने खुद के बारे में जानने के लिए साथ चलने के लिए बार-बार कहता है तो जया भी उसके साथ इस खास टूर में साथ चलती है। योगी उस वक्त हैरान रह जाता है जब ऋषिकेश में उसकी पहली प्रेमिका का पति उसे अपना साला और उसके बच्चे उसे मामा जी कहकर बुलाते है। यहां से फ्लाइट, ट्रेन और टैक्सी से योगी और जया की इस जर्नी के आसपास पूरी फिल्म घूमती है।

फिल्म समीक्षा इत्तेफाक

फिल्म रिव्यू: इरफान और पार्वती दोनों ही अपने अपने किरदारों में 100 फीसदी फिट रहे हैं। पार्वती साउथ की जानी मानी ऐक्ट्रेस हैं, उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय किया है। इरफान जब भी स्क्रीन पर आते है तो हॉल में बैठे दर्शकों को कुछ पल हंसने का मौका मिलता है। नेहा धूपिया, ईशा श्रवणी, नवनीत निशान और कैमियो रोल में ब्रिजेंद्र काला ने अपनी छाप छोड़ी है। तारीफ करनी होगी तनुजा की जिन्होंने फिल्म में गानों का कहानी का हिस्सा बनाकर पेश किया है। 'जाने दो' और 'खत्म कहानी' गानों का फिल्मांकन शानदार है तो फिल्म की लोकेशन की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। टैक्सी से लेकर हवाई जहाज और ट्रेन की लग्जरी क्लास से लेकर स्लीपर क्लास के सीन्स जानदार बन पड़े हैं तो ऋषिकेश की लोकेशन के बाद गगंटोक की लोकेशन दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने का काम करती है।

ज़िंदगी में आज भी है करीब-करीब सिंगल वाली स्थिति -इरफान खान

एक बार जरूर देखें: इस फिल्म को देखने की दो वजह हैं। लंबे अर्से बाद तनुजा चंद्रा के स्टाइल की बनी फिल्म देखना। अब यह बात अलग है कि इस बार तनुजा पिछली फिल्मों जैसा जादू नहीं चला पाईं। साउथ की ऐक्ट्रेस पार्वती के साथ इरफान खान की गजब केमेस्ट्री भी देखने लायक है। हालांकि कहानी का बेहद धीमी रफ्तार से आगे खिसकना और लंबे सीन्स फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी हैं। इसके अलावा दर्शकों को पहले से क्लाइमैक्स का आभास हो जाना भी निर्देशन की खामी ही कहा जाएगा। 

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