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गैंगरेप की रिपोर्ट में जबरदस्ती को बना दिया सहमति

Last Modified - November 10, 2017, 3:44 pm

भोपाल में यूपीएससी की कोचिंग कर रही छात्रा से हुए गैंगरेप केस में एक और बड़ी लापरवाही सामने आयी है. ये लापरवाही अस्पताल की ओर से हुई है. सुलतानिया अस्पताल में रेप पीड़िता की मेडिकल जांच हुई थी.

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जिसकी रिपोर्ट बेहद हैरान करने वाली है. रिपोर्ट में न सिर्फ शाब्दिक गलती है बल्कि ये भी लिखा गया है कि जो हुआ पीड़िता की मर्जी से हुआ. इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है.

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'वो उसे नाले में लेकर गए और उसके बाद में उसकी सहमति और इच्छा से शारीरिक रिश्ते बनाए'

कुछ ऐसे शब्दों में लिखी गयी भोपाल गैंगरेप पीड़िता की पहली मेडिकल रिपोर्ट. इस रिपोर्ट ने केस के नरेटिव को ही  उलट पलटकर रख दिया लापरवाही की हद देखिये रिपोर्ट में जबरदस्ती को सहमति बना दिया गया. IBC24 के पास मौजूद इस मेडिकल रिपोर्ट में महज यहीं कमी नहीं है बल्कि रिपोर्ट का पहला शब्द ही हैरानी भरा है. जिसमें लिखा है. ऐज पर एक्यूज्ड यानी आरोपी के मुताबिक. मतलब ये कि पीड़िता को यहां आरोपी बताया जा रहा है. 

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इससे ये अंदाजा हो जाता है कि मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने वाली डॉक्टर खुशबू गजभिए इस संवेदनशील मामले पर कितनी संजीदा हैं. रिपोर्ट में साफ साफ लिखा गया कि पीड़िता की सहमति से संबंध बनाये गये. बाद में दो लोगों ने जबरन ऐसा किया. 

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आपको ये जानकार और ज्यादा हैरानी होगी कि इतने गंभीर मामले में रिपोर्ट जूनियर डॉक्टर ने बनायी थी. हालांकि रिपोर्ट बनाने वाली जूनियर डॉक्टर खुशबू गजभिए ने अपनी गलती मान ली है. खुशबू का कहना है कि वर्क लोड होने के चलते ये गलती हुई. खुशबू ने पीड़िता से माफी भी मांगी है.

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ये रिपोर्ट जैसे ही सामने आई हड़कंप मच गया और अस्पताल प्रबंधन सफाई देने में जुट गया. वहीं, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री शरद जैन की दलील तो और भी हैरान करने वाली है.

ज्यादातर वक्त अपने गृह नगर जबलपुर में ही गुजारने वाली मंत्री जी आप कब भोपाल आएंगे और कब रिपोर्ट देखकर कार्रवाई करेंगे. ये तो नहीं पता लेकिन क्या आपको अंदाजा भी है कि उस मासूम लड़की पर क्या गुजर रही होगी जिसे सिस्टम ने एक और जख्म दिया है.

जब गैंगरेप पीड़ित को अंदर तक हिला देने वाली ये खबर सामने आई तब प्रदेश के मुखिया महिला सुरक्षा पर बैठक कर रहे थे. लेकिन इस बैठक में न तो गृहमंत्री थे न ही महिला बाल विकास विभाग की मंत्री. बैठक की गंभीरता का अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है. पर क्या फर्क पड़ता है क्योंकि यहां जख्म देने वाला भी सिस्टम है और कुरेदने वाला भी सिस्टम है.

 

सत्य विजय सिंह के साथ सुधीर दंडोतिया, IBC24, भोपाल 

 


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