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भाजपा-कांग्रेस के बीच था अघोषित समझौता, टूटा तो शुरू हुई बिलो बेल्ट राजनीति

Last Modified - November 10, 2017, 9:01 pm

छत्तीसगढ़ में राजनीति हद से ज्यादा ना गिर जाए, इसके लिए तीन साल पहले बीजेपी-कांग्रेस के बीच अघोषित सहमति बनी थी। कोई एक दूसरे के कार्यायल में नहीं घुसेगा, ना एक दूसरे के दफ्तर में कालिख पोतेगा। एक दूसरे के बड़े नेताओं को काले झंडे दिखाने से परहेज करेगा। लेकिन सीडी कांड से आए उबाल ने ये अलिखित समझौता तहस नहस कर दिया है। इस कांड के बाद नेताओं के बंगले में जूते चप्पल भी फेंके गए। दफ्तर में कालिख भी पोती गई। और काले झंडे भी लहराए गए।

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छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर तार तार हो रही है। जिसे ना करने का मूक समझौता हुआ था, टूट कर बिखर रहा है। आदर्श, नैतिकता सब छोटे पड़ रहे हैं। और ये सब शुरू हुआ सीडी कांड के बाद मचे बवाल से। प्रदेश की राजनीती में सक्रिय छोटे से बड़े लोग जानते हैं कि करीब तीन साल पहले इसी गिरती राजनीति से तौबा करने के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक अघोषित सहमति बनी थी। सहमति ये कि दोनो पार्टी के लोग एक दूसरे के दफ्तर में नहीं घुसेंगे, कालिख नहीं पोतेंगे, या फिर एक दूसरे के दिग्गज नेताओं को काले झंडे दिखाने से परहेज करेंगे। लेकिन सीडी कांड के उबाल ने सारे समझौते ध्वस्त कर दिए।

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हालांकि, इसकी शुरूआत आम आदमी पार्टी के नेता ने राजेश मूणत के बंगले पर कालिख पोत कर की। लेकिन समझौते के साझीदार के रुप में सबसे पहले नियम बीजेपी ने तोड़े, जब उसके कार्यकर्ताओं ने भूपेश बघेल के बंगले पर कालिख पोती, उनके घर में जूते चप्पल फेंके। इसके बाद, गुढियारी में पीएल पुनिया को भी काले झंडे भाजपा की तरफ से ही दिखाए गए।

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भाजपा भी मान रही है कि समझौता हुआ था लेकिन दलील ये भी कि नियम तोड़ने के लिए भड़काया कांग्रेस ने ही। भाजपा के बाद नियम कांग्रेस ने भी तोड़े। रायपुर ग्रामीण के युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा कार्यालय में घुसकर कालिख पोतने का काम किया। हालांकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सीएम तक इस गिरती राजनीति पर चिंता जता रहे हैं, और कालिख पोतने से लेकर बिलो बेल्ट की राजनीतिक को दुर्भाग्य करार दे रहे हैं। अगर नियम तोड़ने में भाजपा आगे रही, तो सबसे पहले इसे दुर्भाग्यजनक भी उसी ने करार दिया। लेकिन कालिख, पथराव, जूते-चप्पल उछालने की राजनीति पर कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। शायद, उनका इरादा आक्रामक राजनीति पर टिका हो।

 

राजेश राज, IBC24

 


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