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भारत में असमय मौत का सातवां सबसे बड़ा कारण है डायबिटीज

Last Modified - November 14, 2017, 4:43 pm

 

मीठे ज़हर से सावधान! आपने ये बात न जाने कितनी ही बार सुनी होगी, लेकिन एक भी बार शायद ही ध्यान दिया होगा, नतीजा आपके सामने है। जी हां, बात डायबिटीज़ यानी शूगर यानी मधुमेह की ही हो रही है। भारत को कभी संयमित खानपान के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां भी मधुमेह के लक्षण ने मज़बूती से पांव जमा लिए हैं। 2005 में भारत में असमय मौत के कारणों में डायबिटीज़ 11वें नंबर पर था, लेकिन 2016 में सामने आई रिपोर्ट में ये 7वां सबसे बड़ा कारण बन चुका है। 

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भारत में डायबिटीज़ के बढ़ते मरीजों की संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वक्त 7 करोड़ से ज्यादा लोग इसके शिकार हैं, करीब 13 करोड़ लोग प्री डायबिटीक हैं। ये आंकड़ा भी मुकम्मल तस्वीर नहीं है क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक 47.3 फीसदी लोगों ने तो कभी ये जांच ही नहीं कराई है कि उन्हें शूगर की शिकायत है या नहीं? ये आकंड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में सामने आए हैं। जाहिर है कि ये स्थिति भयावह है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ   यनि वर्ल्ड डायबिटीज़ डे या विश्व मधुमेह दिवस पर स्वस्थ जीवन पद्धति अपनाने का आग्रह किया, बल्कि पिछले महीने के अपने कार्यक्रम मन की बात का एक अंश भी शेयर किया है। 

भारत में डायबिटीज़ के सबसे ज्यादा मरीज महाराष्ट्र, तमिलनाडु और चंडीगढ़ जैसे केंद्रशासित प्रदेश में हैं। इन राज्यों का विकास देश के दूसरे राज्यों से अपेक्षाकृत ज्यादा हुआ है और यहां प्रति व्यक्ति आय भी अच्छी है। इसी से एक साफ संकेत ये भी मिलता है कि डायबिटीज़ के कारणों में खानपान की अनियमितता और अनियंत्रण बड़ा कारण है। हालांकि प्री डायबिटीज़ की मौजूदगी इसके देश भर में फैलने का संकेत दे रही है, जो मिजोरम में 6 फीसदी से लेकर त्रिपुरा में 14.7 फीसदी तक है। बिहार में डायबिटीज़ अपेक्षाकृत कम सिर्फ 4.3 प्रतिशत है, लेकिन वहां भी प्री डायबिटीज़ 10 फीसदी है। इसका अर्थ ये है कि गरीब राज्यों के निवासी भी डायबिटीज़ के शिकार बन रहे हैं। 

मधुमेह के उपचार -

डायबिटीज़ का निदान  लिए योग या अन्य शारीरिक व्यायाम या श्रम नियमित रूप से करने के साथ-साथ जंक फूड, अधिक मीठी खाद्य सामग्री से परहेज की जरूरत है। अनियमित आहार और अनियंत्रित जीवन शैली में बदलाव लाकर ही इस बीमारी से खुद को बचाया जा सकता है।

वेब डेस्क, IBC24

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