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रायपुर में बेरहमी, बैग में मिली दो महीने की बच्ची

Last Modified - November 18, 2017, 10:06 am

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नहरपारा झूलेलाल चौक के किनारे गार्डन में सामान खाली कर रहे मजदूर शुक्रवार शाम करीब 4 बजे हैरान-परेशान हो गए। कहीं से किसी छोटे बच्चे के रोने की आवाज़ आ रही थी, लेकिन बच्चा कहीं नज़र नहीं आ रहा था। मजदूरों को समझ में नहीं आ रहा था कि जब बच्चा कहीं दिख ही नहीं रहा तो फिर रोने की आवाज कैसे आ रही है?

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इसी बीच, एक मजदूर की नजर गार्डन में एक किनारे रखे बैग पर पड़ी, ध्यान देने पर उसे लगा कि आवाज उसी के अंदर से आ रही है। मजदूर समझ तो गया, लेकिन बैग खोलकर देखने की उसकी हिम्मत नहीं पड़ी और भागकर पास की एक दुकान में जाकर वहां दुकानदार को सारा माजरा बताया। इसके बाद जब वहां जुटे और पुलिस को फोन करके खबर दी गई। जब बैग खोला गया तो वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।

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दरअसल, बैग में एक छोटी सी बच्ची थी, देखने से ही वो मुश्किल से महीने-दो महीने की लग रही थी। बच्ची कपड़े में लिपटी थी और बैग में कपड़ा के अलावा दूध की बोतल भी रखी थी। खुशकिस्मती से बच्ची जिंदा थी और स्वस्थ भी, वर्ना जिस तरह से उसे लावारिस हालत में गार्डन में बैग में रखकर छोड़ा गया था, अगर मजदूर वहां नहीं होते तो कुत्तों का शिकार भी बन सकती थी। बैग से निकालने के बाद बच्ची को ठीक-ठाक देखकर सबकी जान में जान आई और चेकअप के लिए पुलिस उसे अस्पताल ले गई। इसके बाद चाइल्ड हेल्प लाइन को सूचना देकर वहां के कर्मियों को बुलाया गया, फिलहाल बच्ची को नर्सरी में रखा गया है।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बच्ची के मां-बाप का पता करने की है। बच्ची बिल्कुल नवजात होती तो अंदाजा लगाया जा सकता था कि लड़की होने के कारण या फिर किसी अवैध रिश्ते से बच्ची के जन्म के कारण इसे छोड़ा गया होगा, लेकिन दो महीने की बच्ची को उसकी मां ने आखिर लावारिस क्यों छोड़ा होगा, इसका अनुमान नहीं लगाया जा पा रहा है।

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जिस तरह से बच्ची को बैग में कपड़ों में लपेटकर और बगल में दूध की बोतल रखकर गार्डन में छोड़ा गया था, उससे इस मासूम के प्रति उसे छोड़ने वाले या छोड़ने वाली का प्यार, लगाव भी दिखता है, ऐसे में एक संभावना ये भी बनती है कि कहीं कोई मज़बूरी तो नहीं रही होगी? ये भी हो सकता है कि बच्ची स्वस्थ रहे, उसके साथ कोई अनहोनी न हो, इसलिए उसे उसी वक्त छोड़ा गया होगा.

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जब छोड़ने वालों ने आसपास मजदूरों को देखा होगा। बहरहाल इन तमाम सवालों के जवाब इस वक्त तो किसी के पास नहीं हैं और जबतक उसके मां-बाप का पता-ठिकाना नहीं चल जाता, उनकी तलाश नहीं हो पाती, तबतक जवाब भी सामने आने की उम्मीद नहीं है।

वेब डेस्क, IBC24


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