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छत्तीसगढ़ के कौन से हैं 36 किले ?

Last Modified - November 21, 2017, 1:50 pm

प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ क्षेत्र को दक्षिण कोसल के रूप में जाना जाता था। प्राचीन इतिहास के अनुसार विंध्याचल के दक्षिण में स्थित कोसल जनपद की उत्तरी कोसल से भिन्नता दर्शाने के लिए इसे दक्षिण कोसल कहते थे। मान्यता यह भी है कि भगवान राम के पुत्र कुश का कौशल राज्य क्षेत्र यही था. 14वीं शताब्दी में जब यहां रायपुर शाखा के कलचूरि राजाओं का प्रभुत्व था, उससे पूर्व ही इसे छत्तीसगढ़ कहा जाने लगा था. इस नाम के संबंध में कुछ भिन्न मत है। कहा जाता है कि यहां कभी 36 किले अर्थात गढ़ थे, इसलिए इस क्षेत्र को छत्तीसगढ़ कहने लगे. कुछ लोगों का मानना था कि उस समय 84 गांवों के समूह को गढ़ कहते थे. तब इस क्षेत्र में करीब 3025 गांव थे। जिस आधार पर यहां 36 गढ़ हुए एक मत यह भी है कि चेदिवंश के राज्यकाल में यहां का नाम चेदिसगढ़ रख दिया गया था. यह समय के साथ अपभ्रंश होकर छत्तीसगढ़ कहलाने लगा। यह नाम इस क्षेत्र को कभी भी मिला हो परंतु इस प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा सन 2000 में मिला.कलचुरि शासन में गढ़ महत्वपूर्ण इकाई थी .छत्तीसगढ़ ३६ में विभाजित था. छत्तीसगढ़ में कलचुरियो की दो शाखाये थी.

जानकारी : ब्रम्हदेव के खल्लारी शिलालेख.

विभाजन  : शिवनाथ नदी ( उत्तर में रतनपुर शाखा एवं दक्षिण में रायपुर शाखा )

रतनपुर के 18 गढ़ 

रतनपुर,

उपरोड़ा,

मारो,

विजयपुर,

खरौद,

कोटगढ़,

नवागढ़,

सोढ़ी,

ओखर,

पडरभट्ठा,

सेमरिया,

मदनपुर,

कोसगई,

करकट्टी,

लाफा,

केंदा,

मातीन,

पेण्ड्रा,

 इसे भी पढ़ेसांस्कृतिक विविधता से ओत-प्रोत सिरपुर

 

रायपुर के 18 गढ़  

रायपुर,

पाटन,

सिगमा,

सिंगारपुर,

लवन,

अमीर,

दुर्ग,

सारधा,

सिरसा,

मोहदी,

खल्लारी,

सिरपुर,

फिंगेश्वर,

सुवरमाल,

राजिम,

सिंगारगढ़,

टेंगनागड़,

अकलवाड़ा,

  इसे भी पढ़े- छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम

 

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