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शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के ज़रिए राजनीति चमका रहे राजनेता

Last Modified - November 23, 2017, 2:22 pm

प्रदेश सरकार के खिलाफ शिक्षाकर्मियों की हड़ताल राजनेताओं के लिए अपनी राजनीति चमकाने का जरिया बन गई है। सभी विपक्षी दलों के नेता शिक्षाकर्मियों के खैरख्वाह बन बैठे हैं और बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। बिलासपुर में हड़ताल के तीसरे दिन शिक्षाकर्मियों के धरनास्थल पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो अजीत जोगी पहुंचे।

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उन्होंने शिक्षाकर्मियों के इस आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि यदि 2018 में उनकी सरकार बनेगी तो दूसरे ही दिन शिक्षाकर्मियों की सभी मांगे मान ली जाएंगी और प्रदेश में शिक्षक को सिर्फ शिक्षक कहा जाएगा, शिक्षाकर्मी नहीं। उन्होंने सरकार बनते ही सभी शिक्षाकर्मियों के संविलियन का वादा भी किया। 

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वहीं अजीत जोगी के गढ़ मरवाही में पहुंचकर बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री अजय चंद्राकर ने ऐलान किया कि अगले चुनाव में अजीत जोगी कोई चुनौती नहीं हैं। उन्होंने आगे ये भी कहा कि अभी तीसरी पार्टी का रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ है, पहले वो तो हो जाए. फिर देखेंगे। इसके अलावा उन्होंने पेंड्रा को जिला बनाने का आश्वासन देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में जिला पुनर्गठन का काम शुरू होगा, जिसमें पेंड्रा को भी जिला बनाया जाएगा।

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सरकार के कामकाज की समीक्षा करने हेलिकॉप्टर से पहुंचे मंत्री अजय चंद्राकर ने मीटिंग तो नहीं ली, अलबत्ता यहां आए लोगों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों की शिकायतें लेते रहे। करीब एक घंटे तक मंत्री लोगों की शिकायत सुनते रहे। इस मौके पर अजय चंद्राकर ने CD कांड का जिक्र करते हुए कहा कि ये ओछी राजनीति है। वहीं विवादित फिल्म पद्मावती को लेकर कहा कि मैंने फिल्म देखी नहीं है, इसलिए कुछ नहीं कहना चाहता।

 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी शिक्षाकर्मियों की मांग का समर्थन करते हुए आश्वासन दिया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो बिना देर किए शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर दिया जाएगा. 

 

 

वेब डेस्क, IBC24

 

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