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किस आसन से होगा कितना लाभ

Created at - December 5, 2017, 4:11 pm
Modified at - December 5, 2017, 4:11 pm

योग करने से पहले उसके आसनो को जानना जरुरी होता है अलग अलग आसान से अलग अलग तरीके से लाभ होता है आइये जानते हैं कुछ खास आसान के बारे में 

अर्ध चन्द्रासन -जैसा कि नाम से पता चल रहा है,इस आसन में शरीर को अर्ध चन्द्र के आकार में घुमाया जाता है। इसको भी खड़े रहकर किया जाता है। यह आसन पूरे शरीर के लिए लाभप्रद है।

भुजंग आसन का रोज अभ्यास से कमर की परेशानियां दूर होती हैं। ये आसन पीठ और मेरूदंड के लिए लाभकारी होता है। 

बाल आसन से तनाव दूर होता है। शरीर को संतुलिच और रक्त संचार को सामान्य बनाने के लिए इस आसन को किया जाता है।

बिल्ली को मार्जर भी कहते हैं, इसलिए इसे मर्जरियासन कहते हैं। यह योग आसन शरीर को उर्जावान और सक्रिय बनाये रखने के लिए बहुत फायदेमंद है। इस आसन से रीढ़ की हड्डियों में खिंचाव होता है जो शरीर को लचीला बनाता है।

 

 

नटराज आसन फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इय योग से कंधे मजबूत होते हैं साथ ही बाहें और पैर भी मजबूत होते हैं। जिनको लगातार बैठकर काम करना होता है उनके लिए नटराज आसन बहुत ही फायदेमंद है।

गोमुख आसन शरीर को सुडौल  बनाने वाला योग है। योग की इस मुद्रा को बैठकर किया जाता है। गोमुख आसन स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभप्रद व्यायाम है।हलासन के रोज अभ्यास से रीढ़ की हड्डियां लचीली रहती है। वृद्धावस्था में हड्डियों की कई प्रकार की परेशानियां हो जाती हैं। यह आसन पेट के रोग, थायराइड, दमा, कफ एवं रक्त सम्बन्धी रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है।

सेतु बांध आसन पेट की मांसपेशियों और जंघों के एक अच्छा व्यायाम है। जब आप इस योग का अभ्यास करते है तो शरीर में उर्जा का संचार होता है।रॉकिंग चेयर योग करने से रीढ़ की हड्डियों में ऊर्जा का संचार होता है साथ ही शरीर में रक्त का संचार तेज गति होता है।

सुखासन बैठकर किया जाने वाला योग है। ये योग मन को शांति प्रदान करने वाला योग है। इस योग के दौरान नाक से सांस लेना और छोड़ना होता है।नमस्कार आसन किसी भी आसन की शुरुआत में किया जाता है। ये काफी सरल है।

ताड़ासन के अभ्यास से शरीर सुडौल रहता है और इससे शरीर में संतुलन और दृढ़ता आती है। रोज त्रिकोण मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर का तनाव दूर होता है और शरीर में लचीलापन आता है। कोणासन बैठकर किया जाता है। कमर, रीढ़ की हड्डियां, छाती और कुल्हे इस योग मुद्रा में विशेष रूप से भाग लेते है। इन अंगों में मौजूद तनाव को दूर करने के लिए इस योग को किया जाता है।

उष्टासन यानी उंट के समान मुद्रा। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर की उंट की जरह दिखता है। इसलिए इसे उष्टासन कहते हैं। उष्टासन शरीर के अगले भाग को लचीला एवं मजबूत बनाता है। इस आसन से छाती फैलती है जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी होती है।वज्रासन बैठकर किया जाना जाने वाला योग है। शरीर को सुडौल बनाने के लिए किया जाता है। अगर आपको पीठ और कमर दर्द की समस्या हो तो ये आसन काफी लाभदायक होगा।

वृक्षासन का मतलब है वृक्ष की मुद्रा मे आसन करना। इस आसन को खड़े होकर किया जाता है। इसके अभ्यास से तनाव दूर होता है और पैरों एवं टखनों में लचीलापन लाता है।

बैठकर किये जाने वाले योगों में एक है दंडासन। इस योग की मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से हिप्स और पेडू में मौजूद तनाव दूर होता है और इनमें लचीलापन आता है।

अधोमुखी का मतलब होता है नीचे की ओर सिर झुकाना। इस आसन में कुत्ते की तरह सिर को नीचे झुकाकर योग किया जाता है। इसलिए इसे अधोमुखी श्वान आसन कहा जाता है। आसन मुद्रा मेरूदंड को सीधा बनाये रखने में सहायक होता है।

यह पैरों की मांसपेशियों के लिए अच्छा व्यायाम है।इस आसन को मरे शरीर जैसे निष्क्रिय होकर किया जाता है इसलिए इसे शवासन कहा जाता है। थकान एवं मानसिक परेशानी की स्थिति में यह आसन शरीर और मन को नई ऊर्जा देता है। मानसिक तनाव दूर करने के लिए भी यह आसन बहुत अच्छा होता है।उत्कट आसन से शरीर के नीचले हिस्से कमर, घुटने एवं पैरो में मजबूती आती है। योग की इस मुद्रा से रीढ की हड्डियों को भी लाभ पहुंचता है।


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