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ईमानदारी का ढोल पीटने वाले सभी राजनैतिक दल भ्रष्ट - रिपोर्ट 

Last Modified - December 12, 2017, 7:25 pm

नई दिल्ली। न खाऊँगा और न खाने दूंगा का नारा बुलंद करते मोदी राज के साढ़े 3 साल बाद भी भ्रष्टाचार मिटाने के दावे हवा हवाई ही है, ट्रांस्परेंसी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट ने सारे दलों की सरकारों को बेपर्दा कर दिया है। भाजपा शासित राज्यों में तो भ्रष्टाचार चरम पर है ही, वहीं कांग्रेस के साथ ईमानदारी का ढोल पीटने वाली दिल्ली की आम आदमी सरकार भी भ्रष्टाचार खत्म नहीं कर सकी। पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश के हाल सबसे बदतर बताए गए है, जहां 71 प्रतिशत तक सर्वोच्च भ्रष्टाचार पाया गया। यानी ममता और शिवराज के दावे घूसखोरी के मामले में खोखले साबित हुए हैं।

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मध्यप्रदेश में तो देश का सबसे बड़ा व्यापमं महाघोटाला भी उजागर हुआ, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और हरियाणा की भाजपा सरकारें भी भ्रष्टाचार खत्म करने में नाकाम रही है और आधे से अधिक लोगों ने माना कि सरकारें बदली, मगर भ्रष्टाचार कायम है। इस मामले में पंजाब की कांग्रेस सरकार भी दूध की धुली नहीं, जहां 38 प्रतिशत लोगों ने पहले की तरह ही भ्रष्टाचार की बात कही, केन्द्रीय विभागों में भी रिश्वत देना पड़ती है, जिनमें आयकर, एक्साइज व अन्य विभाग शामिल हैं।

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राज्य सरकारों के अधीन निगम, बिजली, परिवहन जैसे विभाग भ्रष्टाचार के सबसे बड़े अड्डे हैं। 45 प्रतिशत जनता ने पूरे देश में किसी न किसी रूप में विगत एक साल में रिश्वत दी..और ये आंकड़ा भी बढ़ गया। भ्रष्टाचार के किटाणु देशभर में समान रूप से फलते-फूलते रहे हैं और कांग्रेस से लेकर भाजपा, बसपा, सपा, आप सहित तमाम राजनीतिक दल सिर्फ जीरो टॉलरेंस भ्रष्टाचार के दावे चुनावी रैलियों में ही करते हैं और जमीनी हकीकत इसके उलट है। पार्टी विथ डिफरेंस के साथ ईमानदारी का नारा लगाने वाली भाजपा के लिए केन्द्रीय कार्यालयों से लेकर अपनी राज्य सरकारों में व्याप्त भ्रष्टाचार शर्मनाक है।

 

वेब डेस्क, IBC24

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