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इस्लाम इतना कमज़ोर नहीं है कि सिर्फ गीता के उच्चारण से हमें नकार दे - आलिया

Created at - January 4, 2018, 4:28 pm
Modified at - January 4, 2018, 4:28 pm

मेरठ। राज्य स्तरीय श्लोक गायन प्रतियोगिता में छात्रा आलिया खान ने पूरे उत्तर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया था, लेकिन उसकी ये कामयाबी मज़हबी बहस का मुद्दा बन गई। वजह ये थी कि आलिया खान ने भगवान श्रीकृष्ण की तरह ड्रेस पहनकर श्रीमदभगवतगीता का संस्कृत श्लोक सुनाया था। जब आलिया की प्रतिभा, उसके हुनर की तारीफ की जा रही थी, उसी वक्त दारुल उलूम के फतवा विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने इसे इस्लाम विरोधी करार देते हुए धार्मिक बहस छेड़ दी। फारूकी ने आयोजकों को भी नसीहत दी कि किसी भी स्कूल की मुस्लिम बच्चे या बच्ची को इस तरह का परिधान पहनाना इस्लाम के खिलाफ है और ऐसी किसी बात की इजाजत नहीं दी सकती, जो इस्लाम धर्म के खिलाफ हो। 

 

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देवबंदी उलमा ने छात्रा आलिया खान पर सवाल उठाए तो इस पर अपनी प्रतिक्रिया में लोगों ने कहा कि कई मुस्लिम विद्वानों ने गीता व हिन्दू धर्म की अन्य धार्मिक पुस्तकों का उर्दू मे अनुवाद किया है। मशहूर शायर अनवर जलालपुरी ने गीता के श्लोकों को अश्आरों में रूपान्तरित किया है। कई अन्य मुस्लिम विद्वानों ने गीता, रामायण, बाइबिल, का उर्दू व अन्य भाषाओं में अनुवाद कर चुके हैं। 

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अब आलिया खान ने अपने खिलाफ की जा रही टिप्पणियों और फतवा पर करारा जवाब दिया है। इस मुस्लिम छात्रा ने कहा है कि ये एक प्रतियोगिता थी, जिसमें उसने कृष्ण की तरह परिधान पहने और गीता का पाठ किया। इस्लाम इतना कमज़ोर नहीं है कि सिर्फ गीता के उच्चारण या कपड़े पहनने से हमें नकार दे। उन्होंने फतवा जारी किया है, लेकिन मैं आग्रह करती हूं कि मुझे राजनीति में न घसीटें।

आलिया खान ने मुस्लिम धर्मगुरुओं को अपनी प्रतिभा को बहस का मुद्दा नहीं बनाने का अनुरोध किया है, जिसपर देवबंदी उलमा ने अपने जवाब में कहा कि देवी देवताओं का रूप धारण करना इस्लाम के खिलाफ है, लेकिन दारुल-उलूम देवबंद ने पूरे मामले पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

 

वेब डेस्क, IBC24


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