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ओड़िशा के कोलाब प्रोजेक्ट पर छत्तीसगढ़ को आपत्ति, बढ़ेगा जल विवाद 

Created at - January 4, 2018, 3:33 pm
Modified at - January 4, 2018, 3:33 pm

ओड़िशा के मलकानगिरी मीडिल कोलाब प्रोजेक्ट को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने आपत्ति दर्ज करवाई हैं, इस आपत्ति से फिर छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के बीच जल बटवारे को लेकर विवाद गरमा सकता है। छ.ग. सरकार ने कहा, कि ओड़िशा द्वारा बनाये जा रहे प्रोजेक्ट में इन्द्रावती और शबरी नदी का पानी इस्तेमाल किया जा रहा है, यह 1975 में दोनों राज्यों के बीच हुई जलसंधि का उल्लंघन है, इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताते हुए बस्तर के अधिकारियों ने यह भी कहा, कि यदि ये प्रोजेक्ट बनता है, तो नगरनार स्टील प्लांट को पर्याप्त पानी देना संभव नहीं होगा।

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बस्तर के पहले स्टील प्लांट नगरनार को शायद सरकार पर्याप्त पानी नहीं दे पायेगी, और इसकी वजह ओड़िशा का नया हाईडल प्रोजेक्ट है, बस्तर के सीमावर्ती मलकानगिरी और कोरापुट जिले में ओड़िशा मीडिल कोलाब प्रोजेक्ट बना रहा है, जिसकी क्षमता 300 मेगावाट बिजली और 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई की होगी, पर इसके लिए दोनों राज्यों की सरहद पर बहने वाली इन्द्रावती और शबरी नदी का पानी डायवर्ट कर इस्तेमाल किया जा राह हैं, इसी पर छ.ग. सरकार को आपत्ति है, केन्द्रीय जल आयोग ने इस प्रोजेक्ट पर अभिमत मांगा था, जिसके बाद बस्तर के सिंचाई अफसरों ने रिपोर्ट तैयार कर इस प्रोजेक्ट को ना कह दिया है।

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अधिकारियों का कहना है, कि 09.12.1975 को दोनों राज्यों के बीच हुए जलसंधि के समझौते के अनुसार दोनों राज्यों की सरहद पर अगर कोई हाईडल प्रोजेक्ट बनता है, तो इससे दोनों राज्यों को बराबरी का फायदा मिलना चाहिए, इससे बचने के लिए ही ओड़िशा ने बड़ी चलाकी से इन्द्रावती के जोरानाला, नवरंगपुर में अलग डायवर्शन और शबरी नदीं में भी बैराज बनाकर पानी को डायवर्ट करते हुए छ.ग. सीमा से कुछ दूर अपना यह प्रोजेक्ट बनाना शुरू किया है, जिस जगह से शबरी नदीं का पानी डायवर्ट किया है, ठीक उसी जगह से 1.39 मिलियन घन मीटर नगरनार स्टील प्लांट को पानी दिया जाना है, और शबरी नदीं के डाउनस्टील पर छ.ग. के 5 हाईडल प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं, जिनको ओड़िशा के इस निर्माण से नुकसान पहुंचेगा। फिलहाल केन्द्रीय जल आयोग को अपना अभिमत भेजते हुए इस प्रोजेक्ट से छ.ग. के हितों का नुकसान होने का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है।

 

वेब डेस्क, ibc24


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