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बेटी ने बुजुर्ग मां-बाप को घर से निकाला, बस स्टैंड पर गुजारनी पड़ी रात

Created at - January 6, 2018, 12:24 pm
Modified at - January 6, 2018, 12:24 pm

हुबली। मां-बाप अपनी औलाद के लिए पूरी जिंदगी एक कर देते हैं, लेकिन कई बार उनके अपने ही बच्चे रिश्तों को शर्मसार कर डालते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है कर्नाटक के हुबली में, जहां 90 साल के सूर्यकांत और 80 साल की उनकी पत्नी कमलमा सड़क किनारे बने बस स्टैंड पर वक्त गुजारने पर मजबूर हो गए। बस स्टैंड पर कर्नाटक राज्य परिवहन निगम के कुछ कर्मचारियों और ऑटो चालकों ने उनसे उनकी हालत की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि दोनों के पास कुछ भी नहीं है और अब रहने की भी जगह नहीं बची। इसके बाद उन्हें कुछ लोग वृद्धाश्रम लेकर गए। अचानक दोनों घर से बाहर निकाल दिए गए थे, इसलिए उनके पास कागजात भी नहीं थे। जब वो शरण लेने के लिए वृद्धाश्रम पहुंचे तो वहां उनसे पहचान पत्र दिखाने को कहा गया, ये पहचान पत्र थे नहीं, इसलिए उनकी गुहार के बावजूद नहीं रहने दिया गया। ऐसे में वापस ये बुजुर्ग दंपति हुबली बस स्टैंड पर ही आकर टिक गया। दो दिन और दो रात तक जब हुबली बस स्टैंड पर एक बुजुर्ग दंपति के बैठे होने की ख़बर पुलिस को मिली तो वो मदद के लिए आगे आई और वहां से उन्हें सरकारी वृद्धाश्रम ले जाया गया। 

इस मामले में एक और संवेदनशील पहलू ये भी सामने आया कि जिस बेटी ने अपने वयोवृद्ध माता-पिता को बिना ये सोचे हुए घर से बाहर निकाल दिया कि 90 साल और 80 साल की इस उम्र में वो कहां जाएंगे, कैसे जाएंगे, कैसे जी पाएंगे, वहीं इस दंपति ने कोई भी मामला दर्ज कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब पुलिस उनसे ये जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर उनका खुद का घर कहां है और अब तक वो किस तरह और कहां रह रहे थे? ये खबर उन लोगों के लिए एक सबक भी है, जो अपनी ज़िंदगी भर की कमाई, जमा-पूंजी अपने बेटे या बेटी का भविष्य बनाने के लिए लगा देते हैं, लेकिन जब वो खुद उन्हें अपने लिए जरूरत पड़ती है तो उनकी ही औलाद मुंह फेर लेती हैं। ऐसे एक-दो नहीं, बल्कि कई मामले सामने आते रहते हैं, जब बुजुर्गों को अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर वृद्धाश्रम में शरण लेनी पड़ती है। 

वेब डेस्क, IBC24


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