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छत्तीसगढ़ के 126 पुलिस स्टेशनों में वाहन नहीं

Last Modified - January 6, 2018, 4:06 pm

हम फिल्मों में हमेशा देखते हैं की कोई दुर्घटना जब पूरी घटित हो जाती है उसके बाद ही पुलिस पहुंचती है। लेकिन जब से रियल लाइफ में भी होने लगे तो हम क्या कहेंगे। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार  छत्तीसगढ़ में 126 पुलिस स्टेशनों में वाहन और 23 स्टेशनों में  टेलीफोन नहीं है। इस बात से हम समझ सकते हैं कि वाकई में पुलिस की लेट लतीफी की वजह क्या है। 

 

 यह स्थिति सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं है बल्कि कई राज्यों है जहां के थाने  सुविधाओं से वंचित है.ये बात सामने तब आई जब  लोकसभा में पुलिस थानों की हालात पर सवाल पूछा गया।  बी पी आर एंड डी के हवाले से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने संसद में बताया कि देश में 267 पुलिस थानों में टेलीफोन नहीं हैं 129 में वायरलेस सेट और 273 में वाहन नहीं हैं। रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि 51 ऐसे थाने हैं जिनमें न तो टेलीफोन हैं और न ही वायरलेस सेट। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार देशभर में कुल 5 हजार 5 सौ 79 थाने हैं.

 

 

बात को सामने लाए ऑल इंडिया अन्ना द्र्रविड़ मुनेत्र कडग़म (एआईएडीएमके) सांसद बी सेनगुट्टवन जिन्होंने लोकसभा में पुलिस थानों की हालात पर सवाल पूछा था। उन्होंने पूछा कि क्या गृह मंत्रालय की ओर से यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है कि देश में सभी पुलिस थाने जांच किट सहित सभी मूलभूत सुविधाओं से लैस हों। इस पर गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा है कि पुलिस राज्य का विषय है। पुलिस थानों में सुविधाओं सहित प्राथमिक उत्तरदायित्व राज्य सरकारों का है। राज्य सरकारों को राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण (एमपीएफ) योजना के तहत गृह मंत्रालय की ओर से सहायता दी जाती है।

एमपीएफ योजना के तहत खरीदी जाने वाली जांच संबंधी फॉरेंसिंक किटों सहित उपकरण राज्य सरकारों की प्राथमिकताओं पर आधारित होते हैं। झारखंड में 23 थानों में व्हीकल, 64 में टेलीफोन और 22 में वायरलेस नहीं हैं. तेलंगाना के 91 थानों में पुलिस बिना वाहन काम कर रही है. मणिपुर की भी स्थिति खराब है. यहां 25 में वाहन और 30 में वायरलेस नहीं है. सुशासन बाबू के बिहार के 41 थाने बिना टेलीफोन वाले हैं. पंजाब के 30 थानों में टेलीफोन और 16 में वायरलेस नहीं हैं.

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