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सऊदी अरब से शौहर ने सुल्तानपुर भेजा SMS, बीवी को दिया तीन तलाक

Last Modified - January 6, 2018, 6:21 pm

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश। तीन तलाक बिल राज्यसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध को लेकर शीतकालीन सत्र में पास नहीं हो पाया और सत्र समाप्त हो गया। इस बिल को पारित कराने के लिए सभापति ने दोनों पक्षों की जो बैठक बुलाई थी, उसमें भी सहमति नहीं बन पाई, नतीजा ये हुआ कि ये बिल लटक गया। अब तीन तलाक बिल पर कोई भी फैसला संसद के बजट सत्र में ही हो पाने की संभावना है, जो 30 जनवरी से शुरू हो रहा है। इस बीच, उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से तीन तलाक की एक और ख़बर आई है, जिसमें शौहर ने मोबाइल फोन से एसएमएस भेजकर अपनी बीवी को तलाक दे दिया है। सुल्तानपुर के नंदौली का रहने वाला ये व्यक्ति इन दिनों सऊदी अरब में काम करता है और उसने वहीं से एसएमएस पर अपनी पत्नी को तलाक का मैसेज भेजा है। 

 

शौहर के तीन तलाक मैसेज को देखने के बाद पीड़ित बीवी सदमे में है। उसने कहा है कि सारा माजरा सिर्फ एक गाड़ी को लेकर है, जिसके लिए ससुराल के लोग उसे लगातार परेशान करते रहे हैं। महिला ने कहा कि उसके शौहर का रवैया उसके प्रति कभी अच्छा नहीं रहा। अब मुझे फोन पर उनका ये मैसेज मिला है। महिला का एक बेटा है और अब उसके सामने ये मुश्किल आ खड़ी हुई है कि वो अपने बच्चे और खुद की ज़िंदगी कैसे गुजारे? उसका कहना है कि अब जो उसके पास है, वो बस मायका ही है और वो यहां से कहीं नहीं जाएगी।

 

इस तीन तलाक पीड़िता के पिता का कहना है कि दो साल तक सबकुछ बेहतर चल रहा था, उसके बाद उन्होंने (बेटी के ससुराल वालों) दुर्व्यवहार शुरू कर दिया। उसके सास-ससुर ने उसे घर से बाहर निकाल दिया। अब उसके शौहर ने उसे एसएमएस पर तलाक दे दिया। हमने पुलिस को सूचना नहीं दी है। हमारी ओर से तो तलाक की प्रक्रिया पूरी ही हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक बार में तीन तलाक पर रोक लगाई जाने के बाद भी इस तरह की घटनाएं थम नहीं पा रही हैं। सौ से ज्यादा मामले सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी ठहराए जाने के बाद ही सामने आ चुके हैं। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक संसद को इसे रोकने के लिए कानून बनाना है, जिसे लेकर नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल संसद में पेश किया था। इस बिल को लोकसभा में मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन राज्यसभा में इस पर गतिरोध कायम हो गया। गतिरोध की वजह विपक्ष की ओर से इस बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजे जाने पर अड़े रहना है, जबकि सत्तापक्ष इसे मूल रूप में ही पारित कराना चाहती है। 

वेब डेस्क, IBC24

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