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फिर बजा लोक सुराज का बिगुल,स्कूल हुए टीचर विहीन ?

Last Modified - January 12, 2018, 12:53 pm

छत्तीसगढ़ के स्कूलों की आज क्या हालात है आप इस बात से अंदाज जगा सकते हैं की बच्चे साफ शब्दों में कहने लगे हैं की स्कूल में टीचर ही नहीं तो हम जाये क्यों जो बात बच्चे बोल रहे हैं वो सौ फीसदी सच है लेकिन इसकी वजह इस बार शिक्षाकर्मियों की हड़ताल नहीं, बल्कि शिक्षाकर्मियों की वो ड्यूटी, जिसे लेकर पिछले सप्ताह ही कड़ा पत्र पंचायत विभाग ने सभी जिलों को जारी किया था। लेकिन लगता है पंचायत विभाग के पत्र को जिला पंचायत ने डस्टबीन में डाल दिया।

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लिहाजा अधिकांश जिलों में कई शिक्षाकर्मियों की ड्यूटी या तो चुनाव के कामों में लगा दी गयी या फिर शुरू हुए लोक सुराज अभियान में। अब अधिकांश स्कूल फिर से एक-दो शिक्षकों के भरोसे हो गये हैं। वो भी उस सूरत में जब स्कूलों में बोर्ड एग्जाम सर पर है.स्कूलों में सिलेबस पूरा नहीं हुआ है।  प्रैक्टिकल होना है। दुर्भाग्य की बात ये है कि इलेक्शन ड्यूटी में डाटा इंट्री के लिए जिन शिक्षाकर्मियों को लगाया है, उनमें से ज्यादातर वर्ग-1 के हैं. क्योंकि ज्यादातर कंप्यूटर के काम व्याख्याता पंचायत ही जानते हैं. ऐसे में बच्चों का भविष्य एक बार फिर सरकार के गैर शैक्षणिक कामों की वजह से अधर में लटक गया है।

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वोटर लिस्ट के कामों में ड्यूटी लगाये जाने के बाद कल ही राजनांदगांव के अलग-अलग ब्लाक से सैंकड़ों की संख्या में शिक्षाकर्मियों की लोक सुराज में ड्यूटी लगा दी गयी है. छुरिया ब्लाक में ही करीब 115 शिक्षाकर्मियों को लोक सुराज में ड्यूटी लगा दी गयी। तो वहीं दुर्ग के पाटन क्षेत्र में कई शिक्षाकर्मियों की ड्यूटी लोक सुराज अभियान में लगा दी गयी। 

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एग्जाम की तैयारी कराने वाला अधिकांश शिक्षाकर्मी चुनावी ड्यूटी और लोक सुराज अभियान की ड्यूटी बजाने में मशगुल हैं। पूरे प्रदेश में अब तक हजारों की संख्या में शिक्षाकर्मियों की ड्यूटी इसी तरह से लोक सुराज अभियान और अन्य कामों में लगा दी गयी है.अब इसके लिए सरकार क्या सोचती है ये आगे ही देखा जायेगा। 

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