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भारतीय रेल के सभी ट्रेनों के कोच अब एक जैसे और निर्धारित संख्या में होंगे

Last Modified - January 12, 2018, 12:28 pm

बिलासपुर। चेयरमैन रेलवे बोर्ड के बिलासपुर प्रवास से लौटने के बाद, देश के सभी पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के कोच एक जैसे करने और एक निर्धारित संख्या में रखने की कवायद तेज हो गई है. सीआरबी अश्विनी लोहानी ने यहां भी जोन की बैठक में अफसरों से इस मुद्दे पर बात की थी. सभी ट्रेनों में एक जैसे 22 कोच लगाने का लाभ ये होगा कि उसे किसी भी दिशा में कोई ट्रेन बनाकर चलाया जा सके. 

     

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ट्रेनों के लेट होने का बड़ा कारण होता है कोच उपलब्ध नहीं होना, क्योंकि मेंटनेंस और रिपेयर करने के नाम पर कोच यार्ड में भेजा जाता है. जहां जांच और सफाई में लगने वाले समय की वजह से ट्रेनों को कोच नहीं मिल पाता. दूरंतो शताब्दी पैसेंजर और जन शताब्दी और गरीब रथ जैसी ट्रेनों के कोच अलग होते हैं लिहाजा उन्हें दूसरी ट्रेनों में नहीं लगाया जा सकता, यही वजह रेलवे ने सभी ट्रेनों में 22 कोच और एक जैसे जनरल और स्लीपर एसी डिब्बे रखने का फैसला किया है. रेल मंत्रालय इस संबंध में निर्देश और योजना लेकर आ रही है.

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एक जैसी लंबाई की ट्रेनें रहने से उनका परिचालन भी सहज होगा, कयोंकि किसी ट्रेन में 18 डिब्बे तो किसी में 24 डिब्बे होते हैं. लिहाजा कई कोच प्लेफॉर्म से बाहर खड़े होते हैं. लंबी छोटी ट्रेनों के परिचालन में भी कठिनाई होती है लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से भी एक जैसी ट्रेनें चलाना विशेषज्ञों ने भी सही माना है. देखना है रेलवे की ये योजना पटरी पर कब आती है. 

 

 

 

वेब डेस्क, IBC24

 

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