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सुप्रीम कोर्ट के चारों जजों की प्रेस कांफ्रेंस पर देखिए कानूनविदों की प्रतिक्रिया

Created at - January 12, 2018, 1:56 pm
Modified at - January 12, 2018, 1:56 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और लोकतंत्र को बचाने की देश से चार वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की अपील पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर एस सोढ़ी ने कहा है कि उनके ख्याल से प्रेस कांफ्रेंस में शामिल हुए सभी चार जजों पर महाभियोग चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें अब वहां बैठकर और फैसले सुनाने का कोई काम नहीं है। ये ट्रेड यूनियन वाला रवैया गलत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है, ये बात वो नहीं कह सकते, हमारे पास संसद है, अदालतें हैं, पुलिस है।

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जस्टिस सोढ़ी ने कहा कि चार जजों की शिकायत मुद्दों पर नहीं है बल्कि प्रशासनिक विषय को लेकर है। वे सिर्फ 4 हैं, वहां 23 और (न्यायाधीश) हैं। चार एक साथ जुटकर मुख्य न्यायाधीश की छवि धूमिल करते हैं, ये बचकाना और अपरिपक्व रवैया है।

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मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के बाद सर्वोच्च न्यायालय में सबसे सीनियर चार न्यायाधीशों न्यायमूर्ति जे चल्मेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ ने आज इतिहास में पहली बार एक साथ प्रेस कांफ्रेंस की है। इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को लिखी सात पेज की अपनी चिट्ठी जारी की और आरोप लगाया कि पिछले दो महीने से सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह से काम हो रहा है, वो सही नहीं है और देश से लोकतंत्र, न्याय को बचाने की अपील की।

मशहूर वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने इसे न्यायपालिका के लिए काला दिन करार दिया है। उन्होंने कहा है कि इस प्रेस कांफ्रेंस से गलत परंपरा की शुरुआत हुई है, अब आम आदमी सभी न्यायिक आदेशों को संदेह की नज़र से देखेगा, हर फैसले पर सवाल उठेंगे।

हालांकि सुब्रमण्यम स्वामी की राय अलग है, उन्होंने कहा है कि हम इन जजों की आलोचना नहीं कर सकते, इनकी विशिष्ट पहचान है और इन्होंने अपने कानूनी करियर के दौरान काफी बलिदान किया है। हमें इनका सम्मान करना चाहिए। प्रधानमंत्री ये सुनिश्चित करें कि चारों जजों और भारत के मुख्य न्यायाधीश और पूरा सुप्रीम कोर्ट एक मत होकर आगे काम करे।

सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात वकील और मशहूर कानूनविद के टी एस तुलसी ने कहा है कि ये स्तब्ध करने वाला है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से ऐसे कारण रहे होंगे जिसने वरिष्ठतम जजों को ये कदम उठाने पर मजबूर किया। जब वे प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे, उस वक्त उनके चेहरों पर दर्द के भाव कोई भी देख सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के ही वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि ये काफी गंभीर घटनाक्रम है, जिससे मुख्य न्यायाधीश पर बड़ा धब्बा लगा है।

 

 

सूत्रों के हवाले से खबर ये भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अहम घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कानूनमंत्री रविशंकर प्रसाद को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। 

 

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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