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जल्द ही सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने उतरेंगे आदिवासी सड़कों पर

Last Modified - January 15, 2018, 12:29 pm

छत्तीसगढ़ में भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक   बढ़ती राजनीति के बाद वापस तो ले लिया गया है लेकिन अभी भी आदिवासी समाज का गुस्सा शांत हुआ है।हाल ही में  सर्व आदिवासी समाज ने सरकार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है।कल  रायपुर में हुए दो दिनों के कार्यशाला में इस बात फैसला हुआ है कि फरवरी में राज्य सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए प्रदेश भर से आदिवासी राजधानी की सड़कों पर उतरेंगे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

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इस दौरान  आदिवासी नेताओं ने साफ तौर पर सरकार के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया है। और साफ तौर पर सरकार को ये जानकारी देने की कोशिश की है कि  आदिवासी समाज सरकार से बेहद नाराज है.

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आदिवासी समाज का कहना  है कि समाज के प्रति जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी भूल गये हैं सत्ता या विपक्ष के विधायकों को भी कार्यशाला में बुलाया गया था.लेकिन वो नहीं पहुंचे। इससे नाराज आदिवासी नेताओं ने यहां तक कह दिया कि जब वे समाज के किसी काम नहीं आ रहे हैं तो उनका बहिष्कार कर दिया जाना चाहिए। उन्हें न तो किसी कार्यक्रम में बुलाना चाहिए और न ही उनके आमंत्रण पर जाना चाहिए।

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रायपुर के पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला के संबंध में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम ने बताया कि कार्यशाला में प्रदेशभर से समाज प्रमुख आए हैं. इसमें समाज के विधायकों को भी बुलाया गया था। कार्यशाला के पहले दिन शनिवार को कोई भी विधायक नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि समाज की बैठक में उनकी भूमिका पर गंभीरता से चर्चा की गई।

 


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