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केन्द्र व राज्य शासन नक्सल समस्या पर गंभीर नहीं - अजीत जोगी

Last Modified - January 17, 2018, 11:54 am

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री  अजीत जोगी ने बस्तर अंचल में आदिवासी महिला एवं पुरूषों के साथ सी.आर.पी.एफ. के अधिकारियों व कर्मियों द्वारा लगातार भयादोहन करने एवं सी.आर.पी.एफ. कर्मियों के खिलाफ शिकायत करने वाले के साथ मारपीट एवं फर्जी नक्सल मुठभेड़ बताकर गोली मार देने की धमकी पर चिन्ता व्यक्त करते हुये कहा कि जब तक सरकार आदिवासी अंचलों में रहने वाले लोगों के बीच ‘‘विश्वास’’ की भावना एवं सरकार अपने को इन वर्गों के संरक्षक की भूमिका नहीं निभायेगी तब तक नक्सलवाद को खत्म करना एक दिवास्वप्न ही है।

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 जोगी ने कहा कि सबसे दुखद पहलू यह है कि सी.आर.पी.एफ. कर्मियों के द्वारा किये गये दुर्व्यवहार की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी को दी जाती है तो वे भी इन वर्गो के प्रति सहानुभूति न दिखाते हुये उन कर्मियों का साथ देते हैं जो आदिवासियों का शोषण कर रहे हैं। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बीजापुर क्षेत्र में हुये सामूहिक यौन उत्पीड़न जिसमें राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा जांच के बाद सी.आर.पी.एफ. कर्मियों को दोषी मानते हुये इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही किये जाने के निर्देश के बाद भी किसी तरह की कार्यवाही नहीं होने के कारण सी.आर.पी.एफ. कर्मियों द्वारा लगातार इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है.

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जोगी ने कहा कि बस्तर अंचल की समाज सेविका सोनी सोरी के भतीजे लिंगाराम कोडोपी के साथ सी.आर.पी.एफ. बटालियन के कर्मियों द्वारा 14/01/2018 को रात्रि 09.00 बजे सड़क में रोककर मारपीट  व जान से मारने की धमकी इस बात का प्रमाण है कि जिन्हें सरकार द्वारा आदिवासियों की रक्षा की महती जिम्मेदारी दी गई है वे अब नक्सलियों के जगह पर सीधे-साधे निरीह आदिवासियों के जान के दुश्मन बन गये हैं। बस्तर अंचल में लगातार हो रही इस तरह की घटना से एक ओर जहां आदिवासी समाज बेहद डरा हुआ है वहीं दूसरी ओर अपनी सुरक्षा के लिये नक्सलियों से मदद लेने मजबूर हैं।

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 जोगी ने कहा कि नक्सलवाद पूरे बस्तर क्षेत्र में नासूर की तरह फैल रहा है। वहीं राज्य सरकार नक्सलवाद की बढ़ती घटनाओं को नक्सल उन्मूलन के केन्द्रीय फंड पाने के जरिये के रूप में उपयोग कर रही है। सरकार ने इस पर गंभीर प्रयास नहीं किया तो यह विस्फोटक स्थिति बन जायेगी।

 

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