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क्यों मौत को गले लगा रहे हैं वर्दीवाले? क्यों बढ़ रहे हैं सुसाइड के मामले

Last Modified - January 17, 2018, 9:10 pm

एमपी पुलिस में इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है. जवान से लेकर अफसर तक खुदकुशी कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन सिर्फ जांच की बात कहकर हाथ पर हाथ धरे बैठा है..और तो और खुदकुशी को लेकर जो जांच हुई उसकी रिपोर्ट ने तो हर किसी के होश उड़ा दिए..क्या है इस रिपोर्ट में आप भी देख लिजिए..

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एमपी पुलिस ऊपर से जितनी मुस्तैद और चौकन्नी नजर आती है. दरअसल अंदर से उतनी ही खोखली और गैर जिम्मेदार है..ये हम नहीं कह रहे बल्कि जो रिपोर्ट सामने आई है उसके आधार पर कहा जा सकता है. ये रिपोर्ट है पुलिसकर्मियों की खुदकुशी को लेकर. जिसमे ये कहा गया है कि प्रदेश के पुलिस जवानों की खुदकुशी का कारण प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद, लंबी बीमारी और नशे की लत है..साथ ही लगातार ड्यूटी करने के काऱण पुलिसकर्मी खुद को नामर्द समझने लगते हैं..इसलिए वो मौत को गले लगाते हैं.

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पुलिस अफसरों की इस रिपोर्ट में कही ना कहीं इस बात को झुठलाने की कोशिश की गई है कि नौकरी का दबाब औऱ अफसरों की प्रताड़ना के कारण पुलिसकर्मी मौत को गले लगाते हैं..लेकिन जो सच iBC24 आपके सामने रखेगा..वो पुलिस की रिपोर्ट से बिल्कुल जुदा है..यदि पिछले मामलों में गौर करे तो.

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23 दिसम्बर 2017 को अशोक नगर जिले में एएसआई सतीश रघुवंशी ने खुदकुशी की और सुसाइड नोट में वरिष्ठ अफसरों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया...

16 अक्टूबर को जबलपुर में सिविल लाईन थाने में तैनात सिपाही विक्रम जांगले ने फांसी लगाकर खुदकुशी की...नौकरी को लेकर मानसिक तनाव में थे

3 अक्टूबर 2017 को भिंड जिले के रौन थाने के हवलदार रामकुमार शुक्ला ने जहर खाकर खुदकुशी की...टीआई पर प्रताड़ित करने के आरोप लगे

 

ये वो मामले हैं जिनमे सुसाइड नोट में साफ-साफ वरिष्ठ अफसरों पर गंभीर आरोप लगे..लेकिन अधिकारी हैं कि अपनी व्यवस्था सुधारने के बजाए उल्टा पुलिसकर्मियों को ही सवालों के घेरे में ला रहे हैं..लेकिन दुसरी तरफ सरकार एएसआई सतीश रघुवंशी की खुदकुशी मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए पत्र लिखा है. यानी सरकार को भी अपनी पुलिस पर यकीन नहीं है..ऐसे में साफ है कि असलियत तो सभी के सामने है..लेकिन किसी के पास ईमानदारी का चश्मा लगाकर उसे देखने की हिम्मत नहीं..

 

 

सत्य विजय सिंह , आईबीसी 24 , भोपाल

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